
नागौर: हाइवे किनारे स्थित 30 स्कूलों में बच्चों की जान जोखिम में, शिक्षकों को करना पड़ रहा ट्रैफिक कंट्रोल
Posted on 1 अगस्त 2026
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हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, जिले के शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा पर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय और मुख्य राजमार्गों के किनारे संचालित हो रहे 30 से अधिक सरकारी और निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले हजारों मासूमों की जान हर पल खतरे में है। आलम यह है कि इन स्कूलों के बाहर न तो समुचित साइन बोर्ड लगे हैं और न ही वाहनों की गति को नियंत्रित करने के लिए स्पीड ब्रेकर का निर्माण किया गया है।
क्या है स्थिति और किसे है खतरा?
दैनिक स्कूली गतिविधियों के दौरान, विशेषकर सुबह के समय और छुट्टी के वक्त, बच्चों को सड़क पार करने के लिए शिक्षकों को स्वयं सुरक्षा गार्ड की भूमिका निभानी पड़ रही है। शिक्षक हाथों में डंडे और लाल झंडी लेकर वाहनों को रुकवाते हैं, तब जाकर बच्चे सुरक्षित दूसरी तरफ पहुँच पाते हैं। हाइवे पर गुजरने वाले भारी वाहन और अनियंत्रित गति से दौड़ते ट्रक-बसें स्कूलों के पास भी अपनी रफ्तार कम नहीं करते, जो किसी बड़ी अनहोनी को निमंत्रण दे रहे हैं।
प्रशासन और शिक्षा विभाग से क्या है मांग?
अभिभावकों और शिक्षक संघों ने अब इस मुद्दे पर जिला प्रशासन और बीकानेर निदेशालय से सख्त कदम उठाने की मांग की है। प्रमुख मांगे निम्नलिखित हैं:
- स्पीड ब्रेकर्स का निर्माण: सभी संवेदनशील स्कूलों के मुख्य द्वारों के पास 'रंबल स्ट्रिप्स' और स्पीड ब्रेकर्स बनाए जाएं।
- साइन बोर्ड: स्कूलों के 500 मीटर पहले चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं ताकि वाहन चालक सतर्क हो सकें।
- ट्रैफिक पुलिस की तैनाती: छुट्टी और स्कूल समय के दौरान स्थानीय पुलिस बल की गश्त अनिवार्य की जाए।
- सुरक्षा ऑडिट: शिक्षा विभाग द्वारा जिले भर के उन सभी स्कूलों का ऑडिट कराया जाए जो खतरनाक हाइवे किनारे स्थित हैं।
शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी
जयपुर सचिवालय में बैठे आला अधिकारियों को इस गंभीर स्थिति का संज्ञान लेना होगा। केवल शैक्षणिक गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की भौतिक सुरक्षा भी विभाग की प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि समय रहते स्कूलों के बाहर सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए गए, तो किसी भी बड़ी दुर्घटना के लिए विभाग सीधे तौर पर जिम्मेदार होगा। हमारी टीम लगातार इस मुद्दे पर नजर बनाए हुए है और प्रशासन द्वारा उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी आप तक पहुँचाती रहेगी।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।