
नागौर में बिखरा सरकारी तंत्र: मिनी सचिवालय का सपना, अभी भी फाइलों में कैद
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हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, जिले की लगभग 22 लाख की आबादी आज भी बुनियादी सरकारी सेवाओं के लिए शहर भर में भटकने को मजबूर है। प्रशासनिक दक्षता के लिए जिस मिनी सचिवालय की परिकल्पना करीब साढ़े पांच साल पहले की गई थी, वह आज भी फाइलों तक ही सीमित है। बीकानेर रोड पर 151 बीघा जमीन आवंटित होने के बावजूद बजट के अभाव में निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है, जिससे आमजन को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
बिखरी हुई प्रशासनिक व्यवस्था
शहर के अलग-अलग कोनों में स्थित सरकारी कार्यालयों के कारण आम नागरिकों का समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहे हैं। जिला कलेक्ट्रेट शहर के मध्य है, लेकिन अधिकांश महत्वपूर्ण विभाग शहर से दूर अलग-अलग क्षेत्रों में संचालित हैं:
- शिक्षा और स्वास्थ्य: शिक्षा विभाग और सीएमएचओ कार्यालय बीकानेर रोड पर स्थित हैं।
- परिवहन और आवास: जिला परिवहन कार्यालय कलेक्ट्रेट से 4 किलोमीटर दूर है, जबकि हाउसिंग बोर्ड का कार्यालय बालवा रोड पर 5 किलोमीटर की दूरी पर है।
- कृषि और तकनीकी विभाग: कृषि, पशुपालन, राष्ट्रीय राजमार्ग और डिस्कॉम जैसे महत्वपूर्ण विभाग मानासर क्षेत्र में स्थित हैं।
महत्वपूर्ण विभागों में खाली कुर्सियां
भवनों की कमी के साथ-साथ प्रशासनिक तंत्र में रिक्त पदों की भरमार भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। लंबे समय से कई प्रमुख पदों पर स्थायी अधिकारियों की नियुक्ति नहीं हुई है, जिसके कारण अतिरिक्त प्रभार के भरोसे काम चलाया जा रहा है:
- नगर परिषद: आयुक्त का पद रिक्त।
- कृषि विभाग: संयुक्त निदेशक सहित कई महत्वपूर्ण पद लंबे समय से खाली।
- डिस्कॉम: अधीक्षण अभियंता का पद रिक्त।
- स्वास्थ्य विभाग: सीएमएचओ का पद खाली होने से चिकित्सा व्यवस्था पर सीधा असर।
- शिक्षा विभाग: जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक/माध्यमिक) के पद अक्सर रिक्त रहने से शैक्षणिक निर्णय प्रभावित हो रहे हैं।
किराए के भवनों की मार
कई महत्वपूर्ण सरकारी संस्थान, जिनमें श्रम विभाग, जिला रोजगार कार्यालय, राजीविका, नाबार्ड और आयुर्वेद विभाग शामिल हैं, आज भी किराए के भवनों में संचालित हो रहे हैं। इनमें से कई कार्यालय ऐसे गुप्त स्थानों पर हैं, जिनकी जानकारी तक आम जनता को नहीं है। यह स्थिति न केवल सरकारी कामकाज की पारदर्शिता पर सवाल उठाती है, बल्कि विकास की गति को भी अवरुद्ध कर रही है। यदि समय रहते मिनी सचिवालय का निर्माण पूर्ण होता है, तो न केवल प्रशासनिक कार्य सुगम होंगे, बल्कि आमजन को भी एक छत के नीचे सभी समाधान प्राप्त हो सकेंगे।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।