
राजस्थान में स्कूली बच्चों को जीवन रक्षक ट्रेनिंग: सीपीआर और प्राथमिक उपचार सीखेंगे विद्यार्थी
Posted on 7 अगस्त 2026
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हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, राजस्थान के स्कूली शिक्षा ढांचे में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। हाल ही में प्राथमिक उपचार और जीवन रक्षक तकनीकों को लेकर शिक्षा विभाग द्वारा नई पहल की गई है, जिसके तहत अब विद्यार्थियों को सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) जैसे गंभीर कौशल सिखाने पर जोर दिया जा रहा है।
विद्यार्थियों के लिए क्यों जरूरी है यह ट्रेनिंग?
बदलते दौर में शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं रही है। जोधपुर और राज्य के अन्य प्रमुख केंद्रों में विशेषज्ञों द्वारा स्कूली बच्चों को आपात स्थिति से निपटने की कला सिखाई जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को आकस्मिक स्वास्थ्य समस्याओं के दौरान प्राथमिक उपचार में सक्षम बनाना है।
- जीवन रक्षक कौशल: सीपीआर और फर्स्ट एड की जानकारी छात्रों को किसी भी विपरीत परिस्थिति में जान बचाने में मदद करेगी।
- व्यावहारिक प्रशिक्षण: चिकित्सा संस्थानों और विशेषज्ञों के सहयोग से स्कूलों में कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा।
- आपातकालीन तत्परता: यह प्रशिक्षण बच्चों में आत्मविश्वास जगाने और उन्हें समाज के प्रति जिम्मेदार बनाने का एक प्रयास है।
शिक्षा विभाग और मेडिकल जगत का समन्वय
राज्य के मेडिकल कॉलेजों में भी विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों का दौर शुरू हो गया है। आगामी दिनों में बीकानेर निदेशालय और जयपुर सचिवालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप, इस प्रकार की गतिविधियों को पूरे राजस्थान के स्कूलों में विस्तारित किया जा सकता है। विशेष रूप से, पेल्विस और कूल्हे के जटिल ऑपरेशनों पर आयोजित होने वाले नेशनल ट्रेनिंग प्रोग्राम जैसे आयोजन शिक्षकों और सीनियर छात्रों के लिए नई तकनीकी जानकारी का द्वार खोलेंगे।
शिक्षकों और अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण संदेश
शिक्षा विभाग इस बात पर जोर दे रहा है कि छात्रों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ जीवन कौशल (Life Skills) का प्रशिक्षण देना अनिवार्य है। आने वाले समय में शाला दर्पण और अन्य विभागीय पोर्टल के माध्यम से इन ट्रेनिंग प्रोग्राम्स की विस्तृत गाइडलाइन जारी की जा सकती है।
हमारा मानना है कि इस तरह के कार्यक्रम न केवल छात्रों के सर्वांगीण विकास में सहायक होंगे, बल्कि राज्य के भविष्य को अधिक सुरक्षित और जागरूक बनाएंगे। अभिभावकों से आग्रह है कि वे अपने बच्चों को इस प्रकार की स्वास्थ्य जागरूकता कार्यशालाओं में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित करें।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।