
मूंडवा: नागौरी पान मेथी को मिला 'कम्युनिटी वैरायटी' का दर्जा, GI टैग की राह आसान
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नागौर की विश्व प्रसिद्ध नागौरी पान मेथी को अब राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी और महत्वपूर्ण पहचान मिली है। भारत सरकार के पौध किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (PPV&FRA) ने इसे आधिकारिक तौर पर 'सामुदायिक किस्म (Community Variety)' के रूप में पंजीकृत कर दिया है। यह उपलब्धि नागौर के किसानों, विशेषकर मूंडवा तहसील की महिला किसानों के लिए एक गौरव का क्षण है। इस पंजीकरण से नागौरी पान मेथी के नाम और बीज पर किसानों के सामुदायिक अधिकार और अधिक मजबूत हुए हैं, जिससे उन्हें भविष्य में कई नए अवसर मिलेंगे।
हमारे मूंडवा संवाददाता के अनुसार, यह सम्मान नई दिल्ली में आयोजित एक गरिमामय कार्यक्रम में प्रदान किया गया। 28 जुलाई को हुए इस विशेष कार्यक्रम में PPV&FRA के अध्यक्ष डॉ. टी. महापात्र ने स्वयं मूंडवा की प्रधान गीता देवी और अन्य महिला किसान प्रतिनिधियों को यह महत्वपूर्ण प्रमाण पत्र सौंपा। इस मौके पर राजस्थान किसान आयोग के अध्यक्ष सी.आर. चौधरी, कृषि आयुक्त डॉ. पी.के. सिंह सहित कई प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक और विशेषज्ञ भी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस उपलब्धि की सराहना की।
70 वर्षों की पहचान को मिला राष्ट्रीय सम्मान
- नागौरी पान मेथी पिछले लगभग 70 वर्षों से नागौर के कृषि परिदृश्य और किसानों की पहचान का अभिन्न अंग रही है।
- इसकी सबसे खास विशेषता इसकी प्राकृतिक और लंबे समय तक बनी रहने वाली मनमोहक खुशबू है, जो इसे अन्य किस्मों से अलग बनाती है।
- यही वजह है कि देश की कई बड़ी मसाला कंपनियां वर्षों से नागौरी पान मेथी का उपयोग अपने उत्पादों में करती आ रही हैं।
- इसकी खेती मुख्य रूप से नागौर जिले के मूंडवा, मेड़ता, जायल, डेगाना, खींवसर और नागौर के आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर की जाती है।
किसानों को होती है अच्छी आय
नागौरी पान मेथी एक बहु-कटाई वाली पत्तेदार मसाला फसल है, जो किसानों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। एक सीजन में इसकी लगभग 10 बार कटाई की जा सकती है, जिससे किसानों को प्रति एकड़ 2.5 लाख रुपए तक की अच्छी-खासी आय होती है। वर्तमान में, हमारे जिले में करीब 7 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी खेती हो रही है। वर्ष 2024-25 में लगभग 30 हजार मीट्रिक टन सूखी नागौरी पान मेथी का उत्पादन हुआ, जिससे किसानों को अनुमानित तौर पर 450 करोड़ रुपए की रिकॉर्ड तोड़ आय प्राप्त हुई है। यह आंकड़ा नागौरी पान मेथी की आर्थिक महत्ता को दर्शाता है।
सात साल की वैज्ञानिक मेहनत रंग लाई
इस बड़ी उपलब्धि के पीछे लगभग सात सालों का अथक वैज्ञानिक अनुसंधान और किसानों की सक्रिय भागीदारी रही है। जोधपुर स्थित साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर (SABC) ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और नाबार्ड (NABARD) के सहयोग से नागौरी पान मेथी का गहन वैज्ञानिक अध्ययन, दस्तावेजीकरण और पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। यह टीम वर्क ही आज इस सम्मान का मुख्य आधार बना है।
GI टैग की राह हुई आसान, खुलेंगे निर्यात के नए द्वार
इस पंजीकरण से नागौरी पान मेथी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में एक विशिष्ट पहचान मिलेगी। यह बेहतर बीज मानकों, गुणवत्ता प्रमाणन और निर्यात के नए अवसरों के द्वार खोलेगा। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि भविष्य में नागौरी पान मेथी को भौगोलिक संकेतक (GI टैग) मिलने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। जीआई टैग मिलने से नागौर के किसानों को अपने उत्पाद का बेहतर मूल्य मिल पाएगा और उन्हें दुनिया भर के बाजारों तक सीधी पहुंच बनाने में भी आसानी होगी। हमारी टीम मानती है कि यह कदम नागौर के कृषि क्षेत्र के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी और किसानों का जीवन स्तर सुधरेगा।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।