
जायल कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: सड़क हादसे के मृतक के परिजनों को 1.11 करोड़ का मुआवजा
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हमारे जायल संवाददाता के अनुसार, नागौर जिले की जायल अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मोटर वाहन अधिनियम के तहत ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को दिवंगत के परिवार को 1 करोड़ 11 लाख 14 हजार 226 रुपए का मुआवजा देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने दावा याचिका दायर होने की तारीख से भुगतान की तारीख तक 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देने के निर्देश दिए हैं।
पांच साल बाद मिला न्याय
यह फैसला नागौर जिला परिषद में पंचायत प्रसार अधिकारी के पद पर कार्यरत रहे अशोक कुमार सैन के सड़क हादसे में हुई मृत्यु से जुड़ा है। वर्ष 2021 में मुंडवा के निरीक्षण के लिए जाते समय एक बस की टक्कर से उनकी दुखद मृत्यु हो गई थी। हादसे के बाद, अशोक कुमार के परिवार ने मुआवजे के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। करीब पांच साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद, एडीजे विकास राम चौधरी ने 19 पृष्ठों के अपने फैसले में इंश्योरेंस कंपनी को इस बड़ी राशि का भुगतान करने का आदेश दिया है।
जायल एडीजे कोर्ट का पहला ऐसा आदेश
पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता ओमप्रकाश सैन ने बताया कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत नागौर जिले में यह पहला अवसर है जब जायल एडीजे कोर्ट ने किसी पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपए से अधिक का मुआवजा देने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुआवजे का वितरण
दिवंगत अशोक कुमार सैन अपने पीछे माता-पिता, पत्नी और चार बच्चों सहित सात सदस्यों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए थे, जिनमें दो बच्चे नाबालिग हैं। कोर्ट के आदेशानुसार, कुल मुआवजा राशि का 40 प्रतिशत मृतक की पत्नी सुमन को दिया जाएगा। शेष राशि का 10-10 प्रतिशत मृतक की बेटी नेहा, बेटी स्वाति, नाबालिग पुत्री जयश्री, नाबालिग पुत्र शरद, माता शांति देवी और पिता हनुमानराम को प्रदान किया जाएगा।
मुख्य बिंदु:
- घटना: 21 अप्रैल 2021 को सड़क हादसे में पंचायत प्रसार अधिकारी अशोक कुमार सैन की मृत्यु।
- कार्यस्थल: नागौर जिला परिषद।
- स्थान: मुंडवा जाते समय बस की टक्कर से हुई दुर्घटना।
- न्यायालय: जायल एडीजे कोर्ट।
- निर्णय: इंश्योरेंस कंपनी को 1.11 करोड़ से अधिक का मुआवजा और 7% वार्षिक ब्याज देने का आदेश।
- अवधि: करीब पांच साल चली सुनवाई।
- परिवार: मृतक के पीछे 7 सदस्य (माता-पिता, पत्नी, 4 बच्चे) थे।
कोर्ट के इस फैसले को सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों के लिए एक मिसाल माना जा रहा है, जो भविष्य में ऐसे मामलों में न्याय की उम्मीदों को मजबूत करता है।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।