
मेड़ता रोड बनेगा अत्याधुनिक मेमू हब: 75 करोड़ से हो रहा विकास कार्य
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हमारे मेड़ता संवाददाता के अनुसार...
मेड़ता रोड स्थित डेमू शेड को 75.18 करोड़ रुपए की लागत से एक अत्याधुनिक मेमू अनुरक्षण हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस महत्वपूर्ण परियोजना पर तेजी से कार्य प्रगति पर है और स्टेशन यार्ड से शेड को जोड़ने का विद्युतीकरण कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।
परियोजना के मुख्य बिंदु
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत, मेड़ता रोड में कई नई सुविधाएं जोड़ी जा रही हैं:
- 370 मीटर लंबी नई पिट लाइन का निर्माण: यह लाइन ट्रेनों के रखरखाव और संचालन के लिए आवश्यक है।
- पूर्ण लंबाई का कवर शेड: यह ट्रेनों को मौसम से बचाने और रखरखाव के दौरान बेहतर माहौल प्रदान करेगा।
- तीन नई स्टेबलिंग लाइनें: अतिरिक्त लाइनों से ट्रेनों के ठहराव और रखरखाव की क्षमता में वृद्धि होगी।
- आधुनिक अनुरक्षण उपकरण: नवीनतम तकनीकों से युक्त उपकरणों से ट्रेनों का रखरखाव अधिक कुशल और प्रभावी होगा।
- लोको पायलटों के लिए आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं: नई तकनीकों के अनुरूप चालक दल को प्रशिक्षित किया जाएगा, जिससे रेल संचालन की संरक्षा और गुणवत्ता में सुधार होगा।
मेड़ता रोड का महत्व
मेड़ता रोड डेमू शेड उत्तर पश्चिम रेलवे के प्रमुख अनुरक्षण केंद्रों में से एक है। वर्तमान में, यहां प्रत्येक सप्ताह औसतन 16 डेमू रेकों का रखरखाव किया जाता है। भीलड़ी, पालनपुर, हिसार, श्रीगंगानगर, जैसलमेर, जयपुर, चूरू, सीकर और बाड़मेर जैसे विभिन्न रेलखंडों पर संचालित डेमू सेवाओं के रेकों का अनुरक्षण इसी शेड में होता है।
भविष्य की योजनाएं
उत्तर पश्चिम रेलवे ने जोन में संचालित डेमू रेकों को चरणबद्ध तरीके से मेमू रेकों में बदलने के लिए रेलवे बोर्ड से 48 नई मेमू रेकों की मांग की है। उम्मीद है कि ये रेक जल्द ही उपलब्ध हो जाएंगी, जिससे डेमू सेवाओं की डीजल पर निर्भरता लगभग समाप्त हो जाएगी। मेड़ता रोड-मेड़ता सिटी तथा मकराना-परबतसर के बीच संचालित तीन-कोच डेमू सेवाएं भी इसी अनुरक्षण व्यवस्था का हिस्सा बनेंगी। भविष्य में मेमू सेवाओं के विस्तार के साथ इन रेलखंडों पर विद्युत चालित ट्रेनों का संचालन बढ़ाया जाएगा, जिससे रेलवे की सुविधाओं में विस्तार होगा और संचालन की गुणवत्ता में सुधार होगा। जोधपुर मंडल में वर्तमान में 18 डेमू रैक संचालित हैं, जिनमें 12 डिब्बों वाली 5 रैक और 8 डिब्बों वाली 13 रैक शामिल हैं।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।