
नागौर में खरीफ बुवाई के बाद थमी बारिश, 8 लाख हेक्टेयर फसलें दांव पर
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हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार...
जिले में खरीफ सीजन की शुरुआत अच्छी बारिश के साथ हुई थी, जिससे किसानों ने उत्साहपूर्वक बुवाई की। अब तक लगभग 70 फीसदी लक्ष्य पूरा हो चुका है, लेकिन जुलाई में मानसून की देरी ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। तेज धूप और गर्म हवाओं का असर खरीफ फसलों की बढ़वार पर दिखने लगा है।
8 लाख हेक्टेयर में बुवाई, बढ़वार पर असर
इस खरीफ सीजन में जिले में करीब 8 लाख हेक्टेयर रकबे में बुवाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। जून की बारिश ने किसानों को बुवाई के लिए अनुकूल माहौल दिया, जिसके चलते लक्ष्य का बड़ा हिस्सा समय पर बोया गया। हालांकि, पिछले कुछ समय से बारिश का सिलसिला थमा हुआ है, और तापमान में बढ़ोतरी के कारण पौधों की पत्तियां मुरझाने लगी हैं। यह स्थिति फसल की आगामी बढ़वार के लिए चिंताजनक है।
अगले पांच दिन अहम, बारिश न होने पर बढ़ेगा नुकसान
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि खरीफ फसलों, विशेषकर बाजरा और मूंग, के लिए अगले पांच दिन अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। बाजरे की फसल को बुवाई के लगभग 30 दिन बाद और मूंग को 20 दिन बाद पर्याप्त नमी की आवश्यकता होती है। इस नाजुक पड़ाव पर पानी की कमी सीधे तौर पर उत्पादन को प्रभावित कर सकती है। यदि इस अवधि में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो जिले के कई हिस्सों में फसल को काफी नुकसान होने की आशंका है।
पिछले साल की तुलना में बारिश में भारी कमी
- इस वर्ष जुलाई माह में मानसून की सक्रियता पिछले साल की तुलना में काफी कम रही है।
- 16 जुलाई तक पिछले साल जहां जिले में करीब 350 मिमी बारिश दर्ज की गई थी, वहीं इस वर्ष अब तक केवल 85 मिमी बारिश हुई है।
- मेड़ता, डेगाना जैसे कई इलाकों में मिट्टी में नमी तेजी से घट रही है, जिससे फसलों पर सूखे का प्रभाव स्पष्ट दिखने लगा है।
- बढ़ती जरूरत के कारण सिंचाई की मांग भी बढ़ी है।
कृषि विभाग की सलाह
वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए, कृषि विभाग ने किसानों के लिए एक विशेष एडवाइजरी जारी की है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे इस समय फसलों पर किसी भी प्रकार के रासायनिक छिड़काव से बचें। खेतों से खरपतवारों को समय पर हटाना और उपलब्ध नमी का संरक्षण करना महत्वपूर्ण है। इसके अतिरिक्त, वैज्ञानिक कृषि प्रबंधन तकनीकों को अपनाकर नमी को बचाने के प्रयास किए जाने चाहिए।
खरीफ सीजन का भविष्य बारिश पर निर्भर
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होती है, तो फसलों को सामान्य स्थिति में लाया जा सकता है। लेकिन, यदि मानसून का यह अंतराल लंबा खिंचता है, तो किसानों की लागत बढ़ेगी और उत्पादन पर भी गंभीर असर पड़ेगा। इस संकट की घड़ी में जिले के हजारों किसान अपनी उम्मीदें आसमान की ओर लगाए हुए हैं, जो अच्छी बारिश की आस में हैं।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।