
नागौर: पुश्तैनी जमीन पर कब्जे का आरोप, पीड़ित परिवार ने कलेक्टर से लगाई गुहार
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हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, जिले में पुश्तैनी खातेदारी भूमि पर कथित कब्जे और राजस्व रिकॉर्ड में अनियमितता का आरोप लगाते हुए एक पीड़ित परिवार ने मंगलवार को जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई। परिवार ने प्रशासन से तत्काल मामले की जांच करने और उनकी पैतृक संपत्ति के अधिकार बहाल करने की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
ग्राम लुंगिया निवासी नाथूराम मेघवाल, धारूराम मेघवाल और उनकी बहन चुका देवी ने बताया कि ग्राम बीजाथल स्थित विभिन्न खसरा नंबरों की भूमि पर उनके पूर्वज दशकों से खातेदार काश्तकार रहे हैं। परिवार ने ज्ञापन में स्पष्ट किया कि राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955 के लागू होने से पहले भी इस भूमि पर उनका कब्जा था। राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2016, 2019, 2020, 2023, 2028, 2031 और 2034 तक भी उनके पूर्वजों के नाम खातेदार काश्तकार के रूप में दर्ज थे। यह स्थिति उनकी पुश्तैनी मिल्कियत और कानूनी अधिकार को प्रमाणित करती है।
पड़ोसी पर गंभीर आरोप
पीड़ित नाथूराम मेघवाल ने आरोप लगाया है कि उनके पिता ने खेती-बाड़ी की सुविधा के लिए पड़ोसी उगमाराम जाट को अस्थायी रूप से खेत दिया था। पिता के निधन के बाद, उगमाराम जाट और सुगनचंद ने कथित मिलीभगत से राजस्व रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर बदलाव करवा दिए। परिवार का आरोप है कि इन लोगों ने उनकी पुश्तैनी भूमि का नामांतरण अपने पक्ष में करा लिया, जो कि सरासर धोखाधड़ी है।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि अनुसूचित जाति (SC) की भूमि को नियमों के विपरीत दूसरी जाति के नाम पर दर्ज किया गया है। परिवार का कहना है कि यह एक गंभीर कानूनी अनियमितता है, क्योंकि अनुसूचित जाति की भूमि के हस्तांतरण के संबंध में विशेष नियम और प्रावधान हैं, जिनका घोर उल्लंघन किया गया है।
प्रशासन से न्याय की मांग
पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन से निम्नलिखित मांगें की हैं:
- पुराने राजस्व रिकॉर्ड और दस्तावेजों के आधार पर मामले की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच की जाए।
- वास्तविक वारिसों (मेघवाल परिवार) के नाम खातेदारी एवं काश्तकारी अधिकार तत्काल बहाल किए जाएं।
- कथित अनियमितता में शामिल अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के मामलों की पुनरावृत्ति न हो।
जिला कलेक्टर ने दिया आश्वासन
इस संबंध में जिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार ने परिवार को आश्वस्त किया है। उन्होंने कहा कि प्राप्त ज्ञापन के आधार पर मामले की विस्तृत जांच कराई जाएगी। कलेक्टर ने बताया कि संबंधित विभाग से इस पूरे प्रकरण पर रिपोर्ट तलब की जाएगी और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का यह आश्वासन पीड़ित परिवार के लिए कुछ उम्मीद लेकर आया है।
न्याय न मिलने पर उच्च स्तर पर शिकायत की चेतावनी
मेघवाल परिवार ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें जिला स्तर पर न्याय नहीं मिला और उनकी पुश्तैनी भूमि के अधिकार बहाल नहीं किए गए, तो वे अपनी शिकायत लेकर उच्च स्तर पर भी जाएंगे। फिलहाल, प्रशासन ने मामले की जांच का भरोसा दिया है, और परिवार उम्मीद कर रहा है कि उन्हें जल्द ही न्याय मिलेगा। हमारी टीम इस मामले पर लगातार नज़र रखे हुए है।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।