
नागौर में विश्व आदिवासी दिवस पर वृक्षारोपण, जल-जंगल-जमीन बचाने का संकल्प
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नागौर में विश्व आदिवासी दिवस के पावन अवसर पर रविवार को राष्ट्रीय मीणा महासभा नागौर द्वारा डॉ. अंबेडकर स्मृति भवन में एक गरिमापूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान समाज के लोगों ने प्रकृति संरक्षण का संदेश देते हुए सघन वृक्षारोपण किया और भगवान बिरसा मुंडा के आदर्शों पर चलते हुए 'जल, जंगल और जमीन' को बचाने के लिए कार्य करने का दृढ़ संकल्प लिया। इस पहल का उद्देश्य पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और आदिवासी संस्कृति व अधिकारों की रक्षा करना है।
हमारे खींवसर संवाददाता के अनुसार, कार्यक्रम की शुरुआत अत्यंत श्रद्धापूर्वक तरीके से हुई, जिसमें भगवान बिरसा मुंडा और भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्रों पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर 'जय जोहार' और 'एक तीर, एक कमान, आदिवासी एक समान' जैसे गगनभेदी नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा, जो समाज की एकजुटता और पहचान को दर्शाता था।
समाज की एकजुटता और प्रकृति संरक्षण पर विशेष जोर
वृक्षारोपण के पवित्र कार्य के पश्चात, जिला अध्यक्ष बबलू सोनंदा की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण सभा का आयोजन किया गया। मंच संचालन का दायित्व कोषाध्यक्ष चंद्र प्रकाश मीणा (जेटीओ) ने कुशलतापूर्वक संभाला। उन्होंने अपने उद्बोधन में भगवान बिरसा मुंडा की असाधारण जीवनी पर विस्तार से प्रकाश डाला और समाज तथा प्रकृति संरक्षण के लिए उनके अद्वितीय योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार बिरसा मुंडा ने अपने जीवनकाल में आदिवासी अधिकारों और पर्यावरण की रक्षा के लिए संघर्ष किया, जो आज भी प्रासंगिक है।
सभा में मुख्य वक्ताओं के रूप में कई प्रमुख हस्तियों ने अपने विचार व्यक्त किए। इनमें पूर्व जिला अध्यक्ष कैलाश मीणा, रतन सिंह मीणा, आदिवासी कांग्रेस के जिला अध्यक्ष बुधराम मीणा, डॉ. महेंद्र मीणा, तहसील अध्यक्ष नवीन मीणा, खींवसर ब्लॉक उपाध्यक्ष प्रवीण मीणा, अंबेडकर वेलफेयर सोसाइटी नागौर की ओर से कैलाश वर्मा और भंवरलाल कटारिया शामिल थे। महासचिव केशर सिंह मीणा ने उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों और समाज बंधुओं का स्वागत भाषण के माध्यम से हार्दिक अभिनंदन किया।
वक्ताओं ने अपने संबोधनों में निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर विशेष जोर दिया:
- समाज में एकजुटता बनाए रखने और आपसी सौहार्द को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
- सामाजिक बुराइयों को दूर करने और एक समरस समाज के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता बताई।
- पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला और प्रत्येक व्यक्ति से इस दिशा में सक्रिय योगदान देने की अपील की।
- युवाओं को शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया, साथ ही अपनी समृद्ध सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने का संदेश दिया।
नवनियुक्त कार्मिकों का सम्मान और सामाजिक एकता का संकल्प
इस प्रेरणादायी कार्यक्रम के दौरान नागौर जिले में आदिवासी समाज के उन नवनियुक्त कार्मिकों का विशेष रूप से स्वागत और सम्मान किया गया, जिन्होंने हाल ही में विभिन्न सरकारी सेवाओं में अपना स्थान बनाया है। उन्हें माला पहनाकर सम्मानित किया गया, जो समाज के लिए एक गौरव का क्षण था और युवाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि शिक्षा और रोजगार जहाँ व्यक्तिगत प्रगति के लिए आवश्यक हैं, वहीं अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में जिला अध्यक्ष बबलू सोनंदा ने अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) समाज को साथ लेकर चलने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है जब सभी वर्ग एक साथ मिलकर काम करें। उन्होंने समाज की एकजुटता बनाए रखने और सामूहिक सामाजिक हितों के लिए मिलकर काम करने के अपने संकल्प को एक बार फिर दोहराया। कार्यक्रम में मुनेश मीणा, प्रेम सिंह मीणा, देवीचरण मीणा, शिवसिंह मीणा सहित मीणा समाज के बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे, जो इस आयोजन की सफलता का प्रमाण था।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।