
रियां बड़ी: सुरियास में 10 साल की भाविका को मिली विरासत, बेटी का हुआ पाग दस्तूर
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हमारे रियां बड़ी संवाददाता के अनुसार, नागौर जिले की रियां बड़ी पंचायत समिति के सुरियास गांव में एक बेहद अनूठी और प्रेरणादायक घटना सामने आई है। यहां वर्षों से चली आ रही परंपराओं को तोड़ते हुए समाज ने एक नई मिसाल कायम की है। परिवार के मुखिया के निधन के बाद, 10 साल की इकलौती बेटी भाविका कंवर को उत्तराधिकारी घोषित करते हुए 'पाग दस्तूर' की रस्म निभाई गई।
परंपरा से हटकर लिया साहसी निर्णय
आमतौर पर सामाजिक व्यवस्था में पिता के निधन के बाद परिवार के बड़े बेटे को उत्तराधिकारी बनाया जाता है, लेकिन सुरियास में परिवार की महिलाओं ने इतिहास बदलने का निर्णय लिया। स्वर्गीय कानसिंह राठौड़ के निधन के बाद, परिजनों में दत्तक पुत्र लेने की चर्चा चल रही थी, जिसे उनकी पत्नी और मां ने सिरे से नकार दिया। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि बेटा और बेटी में कोई अंतर नहीं है और परिवार की विरासत अब उनकी बेटी संभालेगी।
इस रस्म की मुख्य विशेषताएं:
- भाविका कंवर बनी उत्तराधिकारी: 10 वर्षीय भाविका ने पिता की विरासत और जिम्मेदारी को संभाला है।
- चार पीढ़ियों का क्रम: पिछले चार पीढ़ियों से परिवार में केवल एक ही बेटा होता आया था, जिसे अब बेटी ने आगे बढ़ाया है।
- सर्वसम्मति से निर्णय: ननिहाल और ससुराल पक्ष के सभी लोगों ने इस ऐतिहासिक निर्णय का पूर्ण समर्थन किया।
- विशिष्ट रस्म: गांव के गणमान्य लोगों और रिश्तेदारों की मौजूदगी में दादी के पीहर पक्ष और स्वयं के ननिहाल पक्ष ने भाविका को पगड़ी पहनाकर रस्म पूरी की।
सामाजिक सोच में आया बदलाव
ग्रामीणों का मानना है कि यह फैसला न केवल उनके गांव के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए एक बड़ा संदेश है। यह रस्म बेटियों को समान अधिकार देने और उन्हें परिवार की मुख्य धारा में जोड़ने का एक सशक्त उदाहरण बनी है। इस अवसर पर गांव के कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे जिन्होंने इस निर्णय की सराहना की। हमारी टीम इस पहल का स्वागत करती है जो सामाजिक कुरीतियों से ऊपर उठकर एक नई सकारात्मक दिशा की ओर बढ़ रही है।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।