
नागौर में छात्र संघ चुनाव की मांग तेज: शुभम रेवाड़ के समर्थन में ज्ञापन
Posted on 3 अगस्त 2026
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हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, राजस्थान विश्वविद्यालय के छात्र नेता शुभम रेवाड़ की आमरण भूख हड़ताल को समर्थन देते हुए, आज नागौर में जिला कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया है। इस ज्ञापन के माध्यम से प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव शीघ्र कराने और राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता प्रदान करने की पुरजोर मांग उठाई गई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब छात्रों और युवा नेताओं के बीच अपने अधिकारों और पहचान के लिए संघर्ष लगातार मुखर हो रहा है।
शुभम रेवाड़ बीते 12 दिनों से अपनी मांगों को लेकर आमरण अनशन पर हैं, और उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। छात्रों ने उनके समर्थन में एकजुटता दिखाते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है ताकि इस गतिरोध को समाप्त किया जा सके और उनकी जायज मांगों पर गंभीरता से विचार किया जा सके।
प्रमुख मांगें और उनका महत्व
ज्ञापन में मुख्य रूप से दो बिंदुओं पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया गया है:
- छात्रसंघ चुनाव की बहाली: विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता विकसित करने और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए छात्रसंघ चुनाव एक महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इनके माध्यम से छात्र न केवल अपनी समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठा पाते हैं, बल्कि उन्हें सार्वजनिक जीवन में भागीदारी का पहला अनुभव भी मिलता है। चुनाव प्रक्रिया छात्रों को नीति निर्माण और विश्वविद्यालय प्रशासन में अपनी आवाज बुलंद करने का अवसर देती है, जिससे एक जीवंत और प्रतिक्रियाशील शैक्षणिक वातावरण बनता है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है, जो उन्हें भविष्य के जिम्मेदार नागरिक के रूप में तैयार करती है।
- राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता: राजस्थानी भाषा प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और पहचान का प्रतीक है। इसे संवैधानिक मान्यता मिलने से न केवल भाषा का संरक्षण होगा, बल्कि इसके विकास के लिए आवश्यक संसाधन और अवसर भी उपलब्ध हो सकेंगे। यह मांग प्रदेश के लाखों लोगों की भावनाओं से जुड़ी है, जो अपनी मातृभाषा को उसका उचित सम्मान दिलाना चाहते हैं। भाषा किसी भी संस्कृति का आधार होती है, और राजस्थानी भाषा को संवैधानिक दर्जा मिलना प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को एक नई पहचान और मजबूती देगा।
अनशन और सरकार से अपील
छात्र नेता शुभम रेवाड़ की 12 दिनों की भूख हड़ताल ने इस मुद्दे को प्रदेशव्यापी बना दिया है। उनके समर्थक छात्रों का कहना है कि सरकार को इस मामले में संवेदनशीलता दिखानी चाहिए और तत्काल सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए। ज्ञापन में मुख्यमंत्री से विशेष रूप से अनुरोध किया गया है कि वे दोनों मांगों पर विचार करें और शुभम रेवाड़ की भूख हड़ताल को समाप्त करवाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करें। छात्रों का मानना है कि उनकी मांगे प्रदेश के युवाओं के भविष्य और सांस्कृतिक अस्मिता से सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं, और इन्हें किसी भी हाल में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इस आंदोलन को नागौर समेत प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से समर्थन मिल रहा है, जिससे सरकार पर इन मांगों को स्वीकार करने का दबाव बढ़ रहा है। छात्रों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।