
राजस्व नियमों में बड़ा बदलाव: अब रजिस्ट्री के बाद स्वतः होगा नामांतरण
Posted on 30 जुलाई 2026
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राज्य सरकार ने जमीन खरीदारों को एक बड़ी राहत प्रदान की है। कृषि भूमि सहित अन्य प्रकार की जमीनों के बंटवारे (पारिवारिक सदस्यों के नाम) और बेचान (अन्य व्यक्तियों के नाम) पर होने वाली रजिस्ट्री के बाद नामांतरण की प्रक्रिया को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। सरकार ने 27 मई 2025 को लागू उस नियम को पुनः स्थापित किया है, जिसके तहत अब जमीन की रजिस्ट्री होते ही स्वतः नामांतरण स्वीकृत हो जाएगा।
सेवा शिविरों पर मंडरा रहा था संकट
स्वतः नामांतरण की प्रक्रिया पर रोक लगने के कारण विभिन्न सेवा शिविर ठप होने की कगार पर पहुंच गए थे। राजस्व मंत्री तक हजारों की संख्या में पहुंची शिकायतों के बाद सरकार ने आमजन की सुविधा को सर्वोपरि मानते हुए यह त्वरित निर्णय लिया है।
तहसीलदारों की रोक से अटकी थी हजारों फाइलें
राजस्व विभाग द्वारा नामांतरण की प्रक्रिया को ऑनलाइन करने के बावजूद, 2025 में स्वतः नामांतरण की व्यवस्था बंद होने के चलते पटवारी और तहसीलदार स्तर पर हजारों की संख्या में नामांतरण की फाइलें रोक ली गई थीं। इस प्रक्रिया में ऑनलाइन स्वीकृत नामांतरण के लिए तहसीलदार के पास एक ओटीपी आता है, लेकिन अक्सर तहसीलदार और नायब तहसीलदार स्तर पर इसे अनावश्यक रूप से लंबे समय तक अटका कर रखा जाता था, जिससे आम नागरिक परेशान हो रहे थे।
नए नियम के मुख्य बिंदु:
- स्वतः नामांतरण: जमीन की रजिस्ट्री सम्पन्न होते ही नामांतरण स्वतः स्वीकृत हो जाएगा।
- प्रक्रिया सरलीकरण: हजारों लंबित फाइलों का त्वरित निस्तारण संभव होगा।
- आमजन को राहत: जमीन के मालिकाना हक के हस्तांतरण में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा।
- सेवा शिविरों को पुनर्जीवन: नामांतरण संबंधी कार्यों के लिए आयोजित होने वाले सेवा शिविरों को अब सुचारू रूप से चलाया जा सकेगा।
इस निर्णय से प्रदेश भर के लाखों जमीन मालिकों को बड़ी सहूलियत मिलेगी और राजस्व संबंधी कार्यों में पारदर्शिता व गति आएगी।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।