
राजस्थान शिक्षा विभाग: एक ही स्कूल में 11 उप-प्राचार्य, 200 स्कूलों में पद खाली
Posted on 4 अगस्त 2026
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हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, शिक्षा विभाग में इन दिनों उप-प्राचार्यों की पदस्थापना को लेकर बड़ी विसंगतियां सामने आ रही हैं। एक तरफ जहां प्रदेश की चुनिंदा बड़ी स्कूलों में उप-प्राचार्यों का अंबार लगा है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों के 200 से अधिक विद्यालयों में ये पद रिक्त पड़े हैं, जिससे प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है।
विभागीय अव्यवस्था का आलम
हालिया स्थिति यह है कि जयपुर सचिवालय और बीकानेर निदेशालय के निर्देशों के चलते पदोन्नति के बाद व्याख्याताओं को उसी स्कूल में यथावत रखा गया, जहां वे पहले कार्यरत थे। परिणाम यह है कि शहर के बड़े स्कूलों में 11-11 उप-प्राचार्य एक ही परिसर में तैनात हैं, जबकि उनके पास कार्य का स्पष्ट बंटवारा न होने से वे वैकल्पिक व्यवस्था के तहत पढ़ाने को मजबूर हैं।
शिक्षकों और वेतन पर असर
- वेतन संबंधी विसंगतियां: एक ही स्कूल में आवश्यकता से अधिक उप-प्राचार्य होने के कारण वेतन प्रक्रिया में तकनीकी बाधाएं आ रही हैं। कई शिक्षकों का वेतन अभी भी पुरानी फाइलों से निकाला जा रहा है।
- नए व्याख्याताओं की नियुक्ति में समस्या: जहां पदोन्नति के बाद व्याख्याताओं के पद रिक्त हुए, वहां नए पदस्थापन हो गए, लेकिन पुराने उप-प्राचार्यों के वहां बने रहने से जॉइनिंग में दिक्कतें आ रही हैं।
- प्रशासनिक भार: जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 200 स्कूलों में उप-प्राचार्य का पद रिक्त होने से प्रधानाचार्यों को दैनिक कार्यों के संचालन में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।
भविष्य की राह
शिक्षा जानकारों का मानना है कि बीकानेर निदेशालय को जल्द ही इन अतिरिक्त उप-प्राचार्यों की काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए ताकि रिक्त पड़े पदों को भरा जा सके। वर्तमान में, राज्य भर में करीब 11 हजार व्याख्याताओं को उप-प्राचार्य बनाया गया था, लेकिन सही पोस्टिंग न मिलने से यह पूरी व्यवस्था असंतुलित हो गई है। हम शिक्षा विभाग से मांग करते हैं कि पारदर्शिता के साथ रेशनलाइजेशन प्रक्रिया अपनाई जाए ताकि ग्रामीण स्कूलों के बच्चों को भी प्रशासनिक नेतृत्व का लाभ मिल सके।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।
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