
नागौर जिले में मानसून की बेरुखी: 8 दिन की सुखाड़ से फसलों पर मंडराया संकट
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हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, जिले में पिछले 8 दिनों से मानसून पूरी तरह से थमा हुआ है। लंबे समय से बारिश न होने के कारण खरीफ की फसलों पर गंभीर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। चिलचिलाती धूप और उमस ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
फसलों की स्थिति और कृषि विभाग का आकलन
कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जिले में इस बार बुवाई का लक्ष्य 8 लाख हेक्टेयर रखा गया था, जिसमें से 70 फीसदी क्षेत्र में बुवाई का कार्य पूर्ण हो चुका है। हालांकि, बीते आठ दिनों से बारिश की कमी के कारण लगभग 50 फीसदी फसलों के सूखने का खतरा उत्पन्न हो गया है। यदि आगामी 4 से 5 दिनों के भीतर अच्छी वर्षा नहीं हुई, तो खड़ी फसलें झुलसकर नष्ट हो सकती हैं।
मौसम का हाल और तापमान का विश्लेषण
- तापमान: शुक्रवार को अधिकतम तापमान 36.3 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 28.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
- मानसून ट्रफ: वर्तमान में मानसून ट्रफ लाइन अपनी सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर (हिमालय की तरफ) शिफ्ट हो गई है, जो राज्य में बारिश की कमी का मुख्य कारण है।
- तापमान का पूर्वानुमान: 17 जुलाई से 29 जुलाई के बीच तापमान सामान्य से 1-2 डिग्री सेल्सियस अधिक रहने की संभावना है।
राहत की उम्मीद: कब होगी बारिश?
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, चिंता की इस स्थिति के बीच एक सकारात्मक संकेत भी मिल रहा है। 22-23 जुलाई से प्रदेश के पश्चिमी और मध्य भागों में मानसून की गतिविधियों में पुनः तेजी आने की प्रबल संभावना है। जुलाई के अंतिम सप्ताह में जोधपुर और बीकानेर संभाग के साथ-साथ नागौर जिले में भी मानसून के सक्रिय होने के आसार हैं, जिससे किसानों को बड़ी राहत मिल सकती है। फिलहाल, किसानों को खेतों में नमी बनाए रखने के लिए विशेषज्ञों की सलाह का पालन करना चाहिए।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।