
नावां: मारोठ थाने के स्थानांतरण पर रोक लगाने की मांग, ग्रामीणों ने सौंपा ज्ञापन
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नावां, नागौर: क्षेत्रवासियों ने रविवार को नावा उपखंड अधिकारी हुक्मीचंद रुलानिया को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें मारोठ पुलिस थाने को उसके वर्तमान स्थान से स्थानांतरित न करने की पुरजोर मांग की गई। ग्रामीणों का कहना है कि यह थाना अंग्रेजों के समय से संचालित हो रहा है और इसका स्थानांतरण जनहित में नहीं है।
ग्रामीणों ने ज्ञापन में विस्तार से बताया कि मारोठ पुलिस थाना दशकों से इस क्षेत्र की सेवा कर रहा है। यह सिर्फ एक पुलिस थाना नहीं, बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों के लिए न्याय और सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। इसकी ऐतिहासिक जड़ें ब्रिटिश काल से जुड़ी हुई हैं, जो इसकी महत्ता को और भी बढ़ा देती हैं।
ऐतिहासिक पहचान और जनसुविधा का आधार
हमारे नावां संवाददाता के अनुसार, क्षेत्रवासियों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि मारोठ की भौगोलिक स्थिति और आवागमन की सुविधा इसे आमजन के लिए सर्वाधिक सुविधाजनक बनाती है। ग्रामीणों के लिए थाने तक पहुंचना आसान है, जिससे उन्हें पुलिस सेवाओं का लाभ उठाने में कोई परेशानी नहीं होती। थाने का वर्तमान स्थान सड़कों और परिवहन मार्गों से सुगमता से जुड़ा हुआ है, जो इसकी उपयोगिता को बढ़ाता है।
ज्ञापन में यह भी बताया गया कि मारोठ एक बड़ा राजस्व ग्राम है, जहाँ बैंक, सहकारी समिति, विद्यालय जैसे कई महत्वपूर्ण सरकारी संस्थान पहले से ही संचालित हैं। इन संस्थानों की उपस्थिति के कारण मारोठ क्षेत्र का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है। ऐसे में, यदि थाने का स्थानांतरण किया जाता है, तो आम लोगों को अनावश्यक रूप से दूर जाना पड़ेगा, जिससे उनकी दिनचर्या और कार्यों में बाधा उत्पन्न होगी। यह स्थिति विशेषकर आपातकालीन सेवाओं की आवश्यकता पड़ने पर अत्यधिक परेशानी का कारण बनेगी।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
उपखंड अधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में क्षेत्रवासियों ने निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखीं:
- मारोठ पुलिस थाने को उसके वर्तमान स्थान पर ही यथावत संचालित रखा जाए ताकि क्षेत्र की जनता को पूर्ववत पुलिस सेवाएं मिलती रहें।
- श्यामगढ़ (सांवतगढ़) में थाने के लिए आवंटित की गई 5 बीघा सरकारी भूमि का आवंटन तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। ग्रामीणों का मानना है कि यह आवंटन जनभावनाओं और जनहित के विरुद्ध है।
- थाने का स्थानांतरण जनविरोधी है और इससे आमजन को अनावश्यक परेशानी, समय की बर्बादी और आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ेगा।
- सरकार क्षेत्रवासियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए इस मामले में सकारात्मक और जनहितैषी निर्णय ले, जिससे शांति और व्यवस्था बनी रहे।
क्षेत्रवासियों ने एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री से अपील की है कि वे इस संवेदनशील मुद्दे पर गंभीरता से विचार करें और मारोठ पुलिस थाने को उसके ऐतिहासिक और सुविधाजनक स्थान पर ही बनाए रखने का निर्देश दें। ग्रामीणों का दृढ़ विश्वास है कि जनसुविधा और प्रशासनिक दक्षता दोनों ही दृष्टियों से मारोठ थाना अपने वर्तमान स्थान पर ही संचालित रहना सबसे उचित विकल्प है। इस निर्णय से न केवल स्थानीय लोगों को राहत मिलेगी, बल्कि कानून व्यवस्था बनाए रखने में भी आसानी होगी।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।