
जायल बाबूलाल गुर्जर हत्याकांड: 20 साल बाद कोर्ट का बड़ा फैसला, 21 आरोपी बरी
Listen News
Audio Summary
हमारे जायल संवाददाता के अनुसार, नागौर जिले के चर्चित बाबूलाल गुर्जर हत्याकांड मामले में शुक्रवार को जायल की एडीजे कोर्ट ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। करीब दो दशक से चल रहे इस कानूनी संघर्ष में न्यायालय ने सभी 21 जीवित आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त करार दिया है।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला वर्ष 2006 का है। खसरा नंबर 1148 में स्थित खान के मालिकाना हक को लेकर बाबूलाल गुर्जर और दूसरे पक्ष के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। 5 फरवरी 2006 को हुई बाबूलाल गुर्जर की निर्मम हत्या ने पूरे क्षेत्र में तनाव पैदा कर दिया था।
आंदोलन और तत्कालीन हालात
हत्या की घटना के बाद मृतक के परिजनों और ग्रामीणों ने न्याय की मांग को लेकर पांच दिनों तक शव को सड़क पर रखकर उग्र प्रदर्शन किया था। स्थिति इतनी भयावह हो गई थी कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान तत्कालीन जिला कलेक्टर आलोक गुप्ता और तत्कालीन एसपी मधुसूदन तक गंभीर रूप से घायल हो गए थे। क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए जांच सीआईडी-सीबी को सौंप दी थी।
कानूनी प्रक्रिया के मुख्य बिंदु
- कुल आरोपी: मामले में कुल 23 लोगों को नामजद किया गया था, जिनमें से 2 आरोपियों की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी है।
- FIR का आधार: मामले की शुरुआत चश्मदीद गवाह उगमाराम गुर्जर के पर्चा बयान के आधार पर हुई थी।
- लंबी सुनवाई: पिछले 20 वर्षों से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन था, जिसमें गवाहों और सबूतों का बारीकी से विश्लेषण किया गया।
- फैसला: अंततः अदालत ने पर्याप्त सबूत न मिलने पर सभी 21 आरोपियों को बरी करने का आदेश दिया।
इस फैसले के बाद से क्षेत्र में न्यायिक प्रक्रिया और इस पुराने विवाद को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। फिलहाल, कोर्ट के इस आदेश ने दो दशक पुराने एक बड़े घटनाक्रम पर पूर्णविराम लगा दिया है।
📲 खबर पसंद आई?
अपने दोस्तों के साथ शेयर करें!

Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।