
नागौर: बच्चों को 'गुड टच-बैड टच' की दी गई जानकारी, शिकायत पेटी भी लगाई
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नागौर जिले में बच्चों को सुरक्षित और जागरूक बनाने के उद्देश्य से राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देश पर विभिन्न सरकारी और निजी विद्यालयों में विशेष जागरूकता शिविरों का आयोजन किया गया। इन शिविरों के माध्यम से विद्यार्थियों को 'गुड टच' और 'बैड टच' के बारे में विस्तार से समझाया गया, ताकि वे स्वयं की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें।
हमारे संवाददाता के अनुसार, इन कार्यक्रमों में न्यायिक अधिकारियों ने बच्चों को सुरक्षित स्पर्श के महत्व के बारे में बताया। उन्हें समझाया गया कि सुरक्षित स्पर्श वह होता है जिससे अपनापन, सुरक्षा और सम्मान का एहसास हो। इसके विपरीत, कोई भी ऐसा स्पर्श जिससे डर, असहजता या गंदा महसूस हो, वह 'बैड टच' की श्रेणी में आता है। अधिकारियों ने बच्चों से दृढ़ता से कहा कि ऐसी किसी भी घटना पर वे चुप न रहें और तुरंत अपने माता-पिता, शिक्षक या किसी भरोसेमंद व्यक्ति को इसकी जानकारी दें। यह चुप्पी तोड़ना ही अपनी सुरक्षा की दिशा में पहला कदम है।
कानूनी प्रावधान और हेल्पलाइन
जागरूकता शिविरों के दौरान विद्यार्थियों को बाल सुरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों की भी जानकारी दी गई। इनमें पॉक्सो एक्ट (लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम), किशोर न्याय अधिनियम, और हाल ही में लागू की गई भारतीय न्याय संहिता-2023 जैसे कानून शामिल थे। अधिकारियों ने जोर देकर बताया कि बच्चों की सुरक्षा के लिए मजबूत कानूनी प्रावधान मौजूद हैं, जिनका उपयोग जरूरत पड़ने पर किया जा सकता है। इसके साथ ही, बच्चों को राष्ट्रीय बाल हेल्पलाइन नंबर 1098 के बारे में भी बताया गया, ताकि वे किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सहायता प्राप्त कर सकें।
शिकायत पेटी और पर्यावरण संरक्षण
- प्रत्येक विद्यालय में 'जूनियर लीगल लिटरेसी क्लब' के माध्यम से एक शिकायत पेटी स्थापित की गई। इसका उद्देश्य यह है कि बच्चे बिना किसी डर या संकोच के अपनी समस्याओं को साझा कर सकें और अपनी बात रख सकें।
- जागरूकता अभियान के दौरान पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया। इस पहल के तहत विभिन्न विद्यालयों में पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसमें बच्चों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
विभिन्न न्यायिक अधिकारियों ने इन अभियानों में सक्रिय रूप से भाग लिया और विद्यार्थियों को उनके कानूनी अधिकारों, बाल सुरक्षा के उपायों और आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखने के महत्व के बारे में जानकारी दी। अधिकारियों ने इस बात पर बल दिया कि बच्चों को एक सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जागरूकता ही अपराधों की रोकथाम का सबसे प्रभावी माध्यम है। इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य बच्चों को सशक्त बनाना है ताकि वे किसी भी खतरे को पहचान सकें और उससे निपटने के लिए आवश्यक कदम उठा सकें। हमारी टीम मानती है कि ऐसे जागरूकता अभियान बच्चों के भविष्य को सुरक्षित और उज्जवल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार...
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।