
नागौर: नर्सिंग भर्ती में 80:20 अनुपात खत्म करने की मांग, अभ्यर्थियों ने उठाई आवाज़
Posted on 4 अगस्त 2026
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हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, प्रदेशभर में नर्सिंग अधिकारी भर्ती परीक्षा में लागू 80:20 के अनुपात को खत्म करने की मांग जोर पकड़ रही है। नर्सिंग छात्र-छात्राओं ने विभिन्न मंचों से इस संबंध में ज्ञापन सौंपकर समान अवसर की वकालत की है। उनकी यह मांग अब जयपुर सचिवालय तक पहुंच चुकी है, जहां स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से इस मुद्दे पर सकारात्मक निर्णय की अपेक्षा की जा रही है।
क्या है 80:20 अनुपात का विवाद?
वर्तमान में नर्सिंग अधिकारी भर्ती समान पात्रता परीक्षा के तहत कुल पदों में से 80 प्रतिशत पद महिला अभ्यर्थियों के लिए और शेष 20 प्रतिशत पद पुरुष अभ्यर्थियों के लिए निर्धारित किए गए हैं। छात्रों का तर्क है कि यह व्यवस्था पुरुष अभ्यर्थियों के लिए समान अवसर की भावना को प्रभावित करती है, जिससे वे अपनी योग्यता और मेहनत के बावजूद पिछड़ जाते हैं।
हमारी टीम ने कई नर्सिंग अभ्यर्थियों से बात की, जिन्होंने बताया कि वर्षों की कड़ी मेहनत और समर्पण के साथ वे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में, जब भर्ती प्रक्रिया में ही लैंगिक आधार पर पदों का बँटवारा कर दिया जाता है, तो यह उनके भविष्य पर सीधा नकारात्मक प्रभाव डालता है। एक पुरुष अभ्यर्थी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "हमने भी उतनी ही फीस देकर नर्सिंग की पढ़ाई की है और उतनी ही मेहनत से परीक्षा की तैयारी करते हैं, फिर हमारे लिए अवसर कम क्यों? यह तो सरासर अन्याय है।"
समान अवसर की वकालत
अभ्यर्थियों का कहना है कि वे किसी वर्ग विशेष के हितों के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि उनकी मांग केवल सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर दिलाने की है। उनका मानना है कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह से योग्यता और मेरिट के आधार पर होनी चाहिए, न कि लिंग के आधार पर। प्रतिस्पर्धा के इस दौर में प्रत्येक अभ्यर्थी को निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया का अधिकार है।
- पुरुष अभ्यर्थियों के लिए कम अवसर: 80:20 अनुपात के कारण पुरुष अभ्यर्थियों को समान योग्यता होने पर भी पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाते।
- मेहनत का अवमूल्यन: वर्षों की कड़ी तैयारी के बाद भी पदों की कमी से निराशा हाथ लगती है।
- निष्पक्षता पर सवाल: भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता प्रभावित होती है।
- मेरिट की अनदेखी: योग्यता के बजाय लिंग के आधार पर चयन से वास्तविक मेरिट को नुकसान।
सरकार से तत्काल समीक्षा की मांग
इस संबंध में जिला कलेक्टर्स के माध्यम से केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री को ज्ञापन सौंपे गए हैं। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से मांग की गई है कि नर्सिंग अधिकारी भर्ती समान पात्रता परीक्षा में लागू 80:20 अनुपात की तत्काल समीक्षा की जाए और इसे समाप्त कर समान अवसर वाली व्यवस्था लागू की जाए। अभ्यर्थियों ने उम्मीद जताई है कि सरकार छात्र हित और जनहित को ध्यान में रखते हुए इस मामले पर सकारात्मक निर्णय लेगी और भविष्य की भर्तियों में सभी के लिए समान अवसर सुनिश्चित करेगी। हमारी टीम डेलीढिंढोरा इस मुद्दे पर लगातार नजर बनाए हुए है और संबंधित अधिकारियों से प्रतिक्रिया जानने का प्रयास कर रही है।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।

