
नागौर: किसानों को मिली प्राकृतिक खेती और आधुनिक पशुपालन प्रबंधन की नई तकनीक
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हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, कृषि विज्ञान केंद्र, अठियासन के तत्वावधान में किसानों के लिए एक विशेष ऑफ-कैंपस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अंचल के किसानों को प्राकृतिक खेती के लाभों और टिकाऊ कृषि प्रणालियों के प्रति जागरूक करना था।
प्राकृतिक खेती के वैज्ञानिक गुर
प्रशिक्षण सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने जोर दिया कि आज के समय में रासायनिक खेती के बजाय प्राकृतिक तरीकों को अपनाना न केवल पर्यावरण के लिए आवश्यक है, बल्कि यह उत्पादन लागत को कम करने में भी सहायक है। वैज्ञानिकों ने मृदा स्वास्थ्य के संरक्षण पर विस्तृत चर्चा की और निम्न जैविक इनपुट के निर्माण पर जोर दिया:
- जीवामृत: मिट्टी की उर्वरक शक्ति बढ़ाने के लिए इसकी उपयोगिता।
- बीजामृत: फसलों को बीमारियों से बचाने के लिए बीजों के उपचार की विधि।
पशुपालन प्रबंधन पर विशेष मार्गदर्शन
कृषि के साथ-साथ पशुपालन को मजबूती देने के उद्देश्य से विशेषज्ञों ने पशुपालकों को वर्षा ऋतु के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में अवगत कराया। कार्यक्रम में शामिल वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि पशुओं की उत्पादकता बनाए रखने के लिए प्रबंधन बेहद जरूरी है। उन्होंने निम्नलिखित बिंदुओं पर महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए:
- संतुलित आहार: पशुओं को उनकी शारीरिक जरूरत के अनुसार पोषक तत्वों से भरपूर चारा देना।
- स्वच्छता का महत्व: बाड़ों में साफ-सफाई रखना ताकि संक्रामक बीमारियों को फैलने से रोका जा सके।
- स्वास्थ्य प्रबंधन: समय पर टीकाकरण और मौसमी बीमारियों से बचाव के उपाय।
इस प्रशिक्षण के दौरान किसानों को जीवामृत और बीजामृत बनाने की व्यावहारिक विधि (हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग) भी सिखाई गई। वैज्ञानिकों ने किसानों के खेतों से संबंधित व्यक्तिगत समस्याओं को सुना और उनका समाधान भी प्रदान किया। इस प्रकार के आयोजन नागौर जिले के किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो रहे हैं।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।