
नागौर: प्रधानाचार्यों ने स्कूल शिक्षा विभाग के रात्रि विश्राम आदेश का किया विरोध, मांगी राहत
Posted on 8 अगस्त 2026
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हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, राजस्थान शिक्षा सेवा परिषद् प्रधानाचार्य (रेसा-पी) की नागौर जिला शाखा ने प्रदेश के शिक्षा विभाग द्वारा जारी हालिया निर्देशों पर गहरी आपत्ति जताई है। परिषद् ने विभाग को औपचारिक पत्र लिखकर स्कूल शिक्षा विभाग के उस निर्देश को वापस लेने की मांग की है, जिसके तहत PEEO और UCEEO को संबलन कार्य के लिए प्रत्येक माह चार रातें विद्यालयों में रुकना अनिवार्य किया गया है।
शिक्षक संघ की आपत्तियां और तर्क
प्रधानाचार्यों का कहना है कि यह आदेश अव्यावहारिक है और इससे न केवल उनके प्रशासनिक कार्यों पर असर पड़ेगा, बल्कि उनकी निजी सुरक्षा और स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ेगा। परिषद् ने अपनी मांगों को मजबूती से रखते हुए विभाग के समक्ष निम्नलिखित बिंदुओं पर विचार करने का आग्रह किया है:
- अव्यावहारिक आदेश: विभाग का हर माह चार रात विद्यालय में रात्रि विश्राम करने का आदेश वर्तमान परिस्थितियों में व्यवहारिक नहीं है।
- सुरक्षा और आवास की समस्या: ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित विद्यालयों में रात्रि प्रवास के दौरान सुरक्षा संबंधी गंभीर चिंताएं हैं। साथ ही, वहां ठहरने के लिए उचित बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है।
- प्रशासनिक कार्यों में बाधा: प्रधानाचार्य पर पहले ही शैक्षणिक और प्रशासनिक दायित्वों का भारी बोझ है, ऐसे में रात्रि प्रवास से अन्य विभागीय कार्यों की गति प्रभावित होगी।
- पुनर्विचार की मांग: राजस्थान शिक्षा सेवा परिषद् ने स्पष्ट कहा है कि शिक्षा में गुणवत्ता सुधार के लिए अन्य विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए, न कि अनिवार्य रात्रि प्रवास जैसे नियमों पर।
शिक्षा विभाग पर दबाव
इस आदेश के विरोध में नागौर जिले के प्रधानाचार्यों ने एकजुटता दिखाते हुए विभाग से मांग की है कि इस नियम को तत्काल निरस्त किया जाए। परिषद् के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आगामी समय में विरोध के स्वर और तेज हो सकते हैं। फिलहाल, शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है, लेकिन जिले भर के प्रधानाचार्यों में इस आदेश को लेकर भारी असंतोष व्याप्त है।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।