
राजस्थान में डॉक्टरों व कर्मचारियों का वेतन संकट: सीएमएचओ कार्यालय पर भारी विरोध प्रदर्शन
Posted on 3 अगस्त 2026
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हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, राज्य में आउटसोर्सिंग के जरिए कार्यरत चिकित्सा कर्मियों का आर्थिक संकट गहरा गया है। पिछले आठ महीनों से वेतन न मिलने के कारण स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। सोमवार को बड़ी संख्या में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ ने सीएमएचओ कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन कर अपनी पीड़ा व्यक्त की।
वेतन भुगतान के बाद भी क्यों है संकट?
संबंधित विभाग द्वारा मैसर्स महात्मा गांधी श्रमिक ठेका सहकारी समिति लिमिटेड को दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 तक का एक करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। इसके बावजूद, कर्मचारियों को उनका उचित मानदेय नहीं मिल रहा है। प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
- आर्थिक संकट: डॉक्टरों का कहना है कि आठ महीने से वेतन नहीं मिलने से उनके परिवार का गुजर-बसर करना मुश्किल हो गया है।
- मनमानी कटौती: कुछ कर्मचारियों को मिले वेतन में भी बिना स्पष्ट कारण के भारी कटौती की गई है।
- ब्लैकलिस्टिंग की मांग: सीएमएचओ कार्यालय द्वारा फर्म को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन धरातल पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के लिए चेतावनी
यह मामला केवल एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि उन सभी सरकारी विभागों के लिए एक बड़ी सीख है जो निजी फर्मों के माध्यम से 'मैनपावर' नियुक्त करते हैं। शिक्षा विभाग में भी अक्सर आउटसोर्सिंग के जरिए लिपिकीय और अन्य कार्य करवाए जाते हैं। समय पर भुगतान होने के बावजूद कर्मचारियों तक पैसा न पहुँचना विभागीय निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
विभाग का क्या है पक्ष?
सीएमएचओ डॉ. अनिल कुमार जैमिनी ने बताया कि विभाग ने फर्म को लंबित वेतन का भुगतान करने के कड़े निर्देश जारी कर दिए हैं। वहीं, फर्म संचालक आशीष शर्मा ने दावा किया है कि कार्यालय से प्राप्त राशि का वितरण किया जा रहा है। हालांकि, कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें केवल एक माह का मानदेय देकर टरकाया जा रहा है।
हमारी टीम इस पूरे मामले पर नज़र बनाए हुए है। किसी भी प्रकार की आधिकारिक पुष्टि के लिए विभाग की वेबसाइट या संबंधित कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर नजर रखें।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।
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