
नागौर: निजी एंबुलेंस बनी प्रसव कक्ष, रास्ते में गूंजी नवजात की किलकारी
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नागौर जिले में मानवीय सूझबूझ और तत्परता का एक अद्भुत उदाहरण सामने आया है, जहां एक निजी एंबुलेंस ने ही प्रसव कक्ष का रूप ले लिया। समय पर अस्पताल न पहुंच पाने की आपातकालीन स्थिति में, एंबुलेंस चालक की सूझबूझ और चिकित्सकों के ऑनलाइन मार्गदर्शन की बदौलत एक गर्भवती महिला ने सुरक्षित रूप से एक स्वस्थ शिशु को जन्म दिया। यह घटना क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और हर कोई एंबुलेंस चालक की तारीफ कर रहा है।
प्रसव पीड़ा बढ़ी, एंबुलेंस बनी सहारा
हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, कुचेरा निवासी बुंदूड़ी नामक महिला को समय से पहले ही प्रसव पीड़ा शुरू हो गई थी। उनकी स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि गर्भस्थ शिशु की धड़कनें कम हो रही थीं। यह एक उच्च जोखिम वाली स्थिति थी, जिसके चलते शुक्रवार रात करीब 9:30 बजे उन्हें कुचेरा के एक निजी अस्पताल से तत्काल जोधपुर रेफर किया गया। परिवार के सदस्य और एंबुलेंस चालक पूरी सावधानी बरतते हुए जोधपुर की ओर रवाना हुए, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
जोधपुर ले जाते समय, रास्ते में महिला की प्रसव पीड़ा अचानक कई गुना बढ़ गई। यह एक अत्यंत नाजुक क्षण था क्योंकि आसपास कोई अस्पताल उपलब्ध नहीं था और प्रसव का समय आ गया था। ऐसी विकट परिस्थिति में, एंबुलेंस में सवार हर व्यक्ति की साँसें अटकी हुई थीं। समय रहते चिकित्सा सहायता न मिलने की स्थिति में माँ और शिशु दोनों के जीवन को खतरा हो सकता था।
वीडियो कॉल पर डॉक्टर का मार्गदर्शन
संकट की इस घड़ी में, निजी एंबुलेंस चालक अमजद खान ने असाधारण सूझबूझ का परिचय दिया। उन्होंने तनिक भी देर न करते हुए तत्काल कुचेरा के निजी अस्पताल के डॉ. हरेंद्र से वीडियो कॉल के माध्यम से संपर्क किया। डॉ. हरेंद्र ने स्थिति की गंभीरता को समझा और वीडियो कॉल पर ही अमजद खान को प्रसव संबंधी आवश्यक निर्देश देने शुरू कर दिए।
एंबुलेंस में उपलब्ध सीमित संसाधनों और डॉक्टर के स्पष्ट मार्गदर्शन का पालन करते हुए, अमजद खान ने एक प्रकार से ऑपरेशन थिएटर का काम किया। उन्होंने धैर्य और साहस के साथ डॉक्टर के हर निर्देश का पालन किया और प्रसव की प्रक्रिया में मदद की। यह एक बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य था, जिसे अमजद खान ने पूरी जिम्मेदारी और कुशलता के साथ निभाया।
- शुक्रवार रात की घटना: कुचेरा निवासी बुंदूड़ी को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर जोधपुर रेफर किया गया।
- रास्ते में बढ़ी पीड़ा: जोधपुर ले जाते समय रास्ते में अचानक प्रसव पीड़ा तेज हो गई।
- एंबुलेंस चालक की पहल: चालक अमजद खान ने तुरंत डॉक्टर हरेंद्र से वीडियो कॉल पर संपर्क किया।
- डॉक्टर का मार्गदर्शन: डॉक्टर के निर्देशों का पालन करते हुए एंबुलेंस में ही प्रसव कराया गया।
- स्वस्थ शिशु का जन्म: कुछ ही देर में एंबुलेंस के भीतर नवजात की किलकारी गूंज उठी।
- सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया गया: बाद में मां और नवजात दोनों को सुरक्षित जोधपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया।
माँ और शिशु दोनों सुरक्षित
कुछ ही देर के भीतर, सभी के लिए सुखद आश्चर्य और राहत की खबर आई – एंबुलेंस में एक स्वस्थ नवजात शिशु की किलकारी गूंज उठी। यह क्षण एंबुलेंस में सवार सभी लोगों के लिए अविस्मरणीय था। अमजद खान की तत्परता और डॉ. हरेंद्र के समय पर मार्गदर्शन के कारण माँ और शिशु दोनों को नया जीवन मिला। प्रसव के बाद, मां और नवजात दोनों को तुरंत जोधपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी उचित चिकित्सा देखरेख की जा रही है। दोनों ही स्वस्थ बताए जा रहे हैं, जिससे परिवार और शुभचिंतकों ने राहत की साँस ली है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आपातकाल में मानव सेवा और सही निर्णय कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।