
प्रदेश के लॉ कॉलेजों में सीटें दोगुनी करने और LLM शुरू करने की मांग तेज, छात्रों को मिलेगी राहत
Posted on 1 अगस्त 2026
Listen News
Audio Summary
नागौर। राजस्थान के सरकारी लॉ कॉलेजों में सीटों की संख्या दोगुनी करने और स्नातकोत्तर विधि (एलएलएम) पाठ्यक्रम शुरू करने की छात्रों की लंबे समय से चली आ रही मांग अब जोर पकड़ रही है। प्रदेश भर के विधि महाविद्यालयों में अध्ययनरत छात्रों ने उच्च शिक्षा आयुक्त के नाम कॉलेज प्राचार्यों को ज्ञापन सौंपकर इस दिशा में तत्काल कदम उठाने की अपील की है। हमारी टीम को मिली जानकारी के अनुसार, छात्रों का कहना है कि वर्तमान में सीटों की अत्यधिक कमी के कारण बड़ी संख्या में योग्य और ग्रामीण पृष्ठभूमि के विद्यार्थी प्रवेश से वंचित रह जाते हैं, जिससे उनके भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
सीमित सीटों से प्रवेश में बाधा
छात्रों द्वारा प्रस्तुत ज्ञापन में बताया गया है कि प्रदेश के कई सरकारी लॉ कॉलेजों में विधि स्नातक (एलएलबी) पाठ्यक्रम के लिए वर्तमान में केवल 60 सीटें स्वीकृत हैं। जबकि हर साल इन सीमित सीटों के मुकाबले करीब चार गुना अधिक आवेदन प्राप्त होते हैं। इस भारी विसंगति के चलते अनेक मेधावी छात्र भी प्रवेश से वंचित रह जाते हैं। कॉलेज में विधि अध्ययन की मांग लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन सीटों की संख्या में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है, जिससे छात्रों में निराशा है। यह स्थिति विशेष रूप से उन क्षेत्रों में विकट है, जहां सरकारी लॉ कॉलेज ही एकमात्र उच्च शिक्षा का विकल्प हैं और कोई निजी कॉलेज उपलब्ध नहीं हैं।
दो जिलों के छात्रों का एकमात्र सहारा
हमने पाया है कि कई सरकारी लॉ कॉलेज आसपास के दो या अधिक जिलों के विद्यार्थियों के लिए एकमात्र सरकारी विकल्प होते हैं। ऐसे में, यदि इन कॉलेजों में सीटों की संख्या सीमित रहती है, तो प्रवेश का दबाव काफी बढ़ जाता है। छात्रों का स्पष्ट मत है कि यदि सरकार सीटों की संख्या में वृद्धि करती है, तो इससे न केवल अधिक विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी, बल्कि शिक्षा का अधिकार भी सही मायने में लागू हो सकेगा। यह आवश्यक है कि राज्य सरकार इस गंभीर समस्या पर तत्काल ध्यान दे और छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे।
एलएलएम के लिए शहरों का रुख करना पड़ता है
छात्रों की एक और प्रमुख मांग सरकारी लॉ कॉलेजों में एलएलएम (स्नातकोत्तर विधि) पाठ्यक्रम शुरू करने की है। ज्ञापन में बताया गया है कि एलएलबी पूरी करने के बाद उच्च शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक विद्यार्थियों को एलएलएम की पढ़ाई के लिए दूसरे बड़े शहरों या महंगे निजी कॉलेजों का रुख करना पड़ता है। इससे ग्रामीण पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों पर आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक बोझ कई गुना बढ़ जाता है। कई छात्र तो आर्थिक कारणों से एलएलएम की पढ़ाई छोड़ ही देते हैं, जिससे उनकी उच्च शिक्षा की आकांक्षा अधूरी रह जाती है।
न्यायिक सेवाओं की तैयारी में मिलेगा लाभ
विद्यार्थियों का तर्क है कि यदि सरकारी लॉ कॉलेजों में ही एलएलएम पाठ्यक्रम शुरू किया जाता है, तो उन्हें अपने गृह जिले या आसपास के क्षेत्रों में ही गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध होगी। इससे उन्हें शोध कार्य और न्यायिक सेवाओं की तैयारी के लिए भी बेहतर अवसर मिल सकेंगे। न्यायिक सेवाओं में जाने के इच्छुक छात्रों के लिए एलएलएम एक महत्वपूर्ण सीढ़ी होती है। हमारी टीम का भी मानना है कि स्थानीय स्तर पर ऐसे पाठ्यक्रमों की उपलब्धता से क्षेत्र के युवाओं को सशक्त बनाने में मदद मिलेगी। उच्च शिक्षा निदेशालय बीकानेर और जयपुर सचिवालय को इस मामले पर गंभीरता से विचार करना चाहिए ताकि प्रदेश के छात्रों को उनका उचित हक मिल सके।
हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, यह मांग सिर्फ कुछ विद्यार्थियों की नहीं, बल्कि प्रदेश भर के विधि छात्रों की है, जो बेहतर और सुलभ उच्च शिक्षा की उम्मीद कर रहे हैं।
📲 खबर पसंद आई?
अपने दोस्तों के साथ शेयर करें!

Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।
संबंधित समाचार (Related News)

नागौर के सरकारी स्कूलों में नया बदलाव: अब अधिकारी हर महीने 4 दिन करेंगे रात्रि विश्राम
1/8/2026

नागौर: जड़ाऊ कला विद्यालय में शिक्षक पुखराज गोदारा का भव्य सम्मान समारोह, 29 वर्षों की सेवा के बाद सेवानिवृत्त
1/8/2026

राजस्थान शिक्षा विभाग: स्कूलों में छात्र संसद और कन्या भारती का गठन, लोकतांत्रिक मूल्यों को मिला बढ़ावा
1/8/2026