
मकराना: अवैध खनन से पनपा बारूद का काला कारोबार, सप्लाई चेन पर एजेंसियों की नजर
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हमारे मकराना संवाददाता के अनुसार, मकराना और आसपास के खनन क्षेत्रों में अवैध खनन का गोरखधंधा अब बारूद के काले कारोबार का जरिया बन गया है। लाइमस्टोन, सैंडस्टोन जैसी खनिजों और पत्थरों के अवैध खनन के लिए धड़ल्ले से विस्फोटक सामग्री का इस्तेमाल हो रहा है, जिससे एक पूरी आपूर्ति चेन सक्रिय हो गई है। पुलिस, एटीएस और एनआइए जैसी केंद्रीय एजेंसियां भी इस गंभीर समस्या को लेकर चिंतित हैं।
खतरनाक विस्फोटकों की अवैध सप्लाई
खदानों में पत्थर काटने और चट्टानों को तोड़ने के लिए डाइनामाइट, कैंडल, डेटोनेटर, अमोनियम नाइट्रेट और रेड वायर जैसे खतरनाक विस्फोटकों की आवश्यकता होती है। नियमानुसार, इन विस्फोटक सामग्रियों की आपूर्ति लाइसेंस के तहत सुरक्षा मापदंडों का पालन करते हुए की जाती है, और इनके उपयोग व भंडारण का पूरा रिकॉर्ड रखा जाता है। हालांकि, अवैध खनन के लिए इन विस्फोटक पदार्थों को तय प्रक्रिया के तहत प्राप्त करना संभव नहीं है। इसी मजबूरी के चलते, अवैध खनन के साथ-साथ विस्फोटकों का अवैध कारोबार भी फल-फूल रहा है।
कानूनी प्रावधान और उल्लंघन
भारत में विस्फोटक पदार्थों पर नियंत्रण एक्सप्लोसिव एक्ट-1884 और एक्सप्लोसिव रूल-2008 के तहत होता है। पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन (पीईएसओ) इनकी निगरानी करता है। किसी भी व्यक्ति, ठेकेदार या खान मालिक के लिए बिना लाइसेंस विस्फोटक खरीदना, बेचना, भंडारण करना या परिवहन करना गैरकानूनी है। इसके परिवहन के लिए भी विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करना अनिवार्य है। नियमानुसार, इन विस्फोटक सामग्रियों का उपयोग भी केवल लाइसेंसी की निगरानी में ही किया जाना चाहिए और सुरक्षा वेन मौके पर उपस्थित रहनी चाहिए।
हालिया बरामदगी और चिंता का विषय
पिछले छह महीनों में नागौर और डीडवाना-कुचामन जिलों में अवैध विस्फोटक सामग्री की बरामदगी की कई बड़ी कार्रवाईयां हुई हैं। नागौर पुलिस ने 21 दिसंबर 2025 को खींवसर थाना क्षेत्र में ऐसे एक्सप्लोसिव बरामद करने का दावा किया, जिनका उपयोग केवल सैन्य गतिविधियों में होता है और जिनके निर्माण, उपयोग एवं आयात पर पूर्ण प्रतिबंध है। इसके बावजूद, इस अनधिकृत सप्लाई नेटवर्क को पूरी तरह से तोड़ा नहीं जा सका है।
समाधान की राह
खनन मामलों के जानकारों का मानना है कि खनन प्रधान क्षेत्रों में डिजिटल ट्रैकिंग, नियमित जांच, लाइसेंस धारकों द्वारा विस्फोटक उपयोग की सतत निगरानी और पुलिस व खनन विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करके इस अवैध कारोबार पर अंकुश लगाया जा सकता है। यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा, अवैध आर्थिक गतिविधियों और पर्यावरण संरक्षण से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।
विगत बरामदगियों का विवरण:
- 21 दिसंबर 2025, ताडावास थाना खींवसर: 354 एक्सप्लोसिव, 87 डेटोनेटर, 302 मीटर बत्ती वायर बरामद।
- अन्य बरामदगी: 125 ग्राम 25 एमएम एक्सप्लोसिव।
पुलिस जांच में सामने आया है कि जब्त की गई ज्यादातर अवैध विस्फोटक सामग्री संबंधित मैगजीन लाइसेंसधारियों से लाई गई थी। ऐसे लाइसेंसधारियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जिले में फिलहाल 35 से अधिक मैगजीन लाइसेंसधारी सक्रिय हैं।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।