
शाला दर्पण प्रपत्र-10: अंतिम तिथि आज, नागौर सहित प्रदेशभर में 15 अगस्त तक बढ़ाने की मांग
Posted on 30 जुलाई 2026
Listen News
Audio Summary
नागौर। राजस्थान के सरकारी स्कूलों में कार्यरत लाखों शिक्षकों पर इन दिनों शाला दर्पण पोर्टल पर प्रपत्र-10 अपडेट करने का भारी दबाव है। इस प्रपत्र को भरने की अंतिम तिथि आज यानी 31 जुलाई 2026 है, लेकिन प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश के लगभग 50-60 प्रतिशत स्कूलों में यह काम अभी भी अधूरा है। ऐसे में शिक्षक संगठनों ने शिक्षा विभाग से इस महत्वपूर्ण कार्य की अंतिम तिथि को 15 अगस्त तक बढ़ाने की पुरजोर मांग की है। शिक्षकों का तर्क है कि पढ़ाई और अन्य ऑनलाइन कार्यों के बढ़ते बोझ के कारण वे समय पर यह काम पूरा नहीं कर पा रहे हैं।
हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, शिक्षा विभाग में जुलाई का महीना शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के कारण वैसे ही काफी व्यस्त माना जाता है। इस दौरान नए विद्यार्थियों के प्रवेश, ड्रॉपआउट रोकने के प्रयास, आधारभूत शिक्षण की शुरुआत और अभिभावकों से संवाद जैसे अनेक महत्वपूर्ण कार्य होते हैं। इस वर्ष इन सभी जिम्मेदारियों के साथ-साथ शिक्षकों को शाला दर्पण पोर्टल पर प्रपत्र-10 अपडेट करने का अतिरिक्त कार्य भी सौंपा गया।
तीन बार बढ़ाई जा चुकी है समय सीमा, फिर भी काम अधूरा
प्रपत्र-10 भरने की अंतिम तिथि पहले 10 जुलाई तय की गई थी। हालांकि, सर्वर की धीमी गति और अन्य तकनीकी समस्याओं के कारण हजारों शिक्षक निर्धारित समय पर प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए। इसके बाद शिक्षा निदेशालय, बीकानेर ने इस समय सीमा को पहले 20 जुलाई और फिर बढ़ाकर 31 जुलाई तक किया। लेकिन, इसके बावजूद बड़ी संख्या में शिक्षकों का काम अधूरा पड़ा हुआ है, जिससे उनमें चिंता और तनाव बढ़ रहा है।
शिक्षण कार्य के साथ डेटा एंट्री का बोझ
शिक्षक संघ रेसटा के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने इस संबंध में बताया कि जुलाई में शाला दर्पण पर विद्यार्थियों के प्रवेश, टीसी जारी करना, डीबीटी, छात्रवृत्ति और पुस्तक वितरण जैसे कई अन्य आवश्यक ऑनलाइन कार्य भी संचालित होते हैं। वहीं, स्टाफ कॉर्नर सुबह 7 बजे से दोपहर 2 बजे तक बंद रहने के कारण प्रपत्र-10 भरने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। ऐसे में शिक्षकों का मुख्य ध्यान शिक्षण कार्य से हटकर डेटा एंट्री पर केंद्रित हो रहा है, जो शिक्षा की गुणवत्ता के लिए ठीक नहीं है। शिक्षक संगठनों, शिक्षाविदों और शिक्षा प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञों का भी यही मानना है कि शिक्षक का प्राथमिक कार्य पढ़ाना है, डेटा एंट्री करना नहीं।
हर साल एक ही जानकारी भरने पर सवाल, ये दिए सुझाव
मोहर सिंह सलावद ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि शिक्षकों की नियुक्ति, सेवा पुस्तिका, वेतन, पदस्थापन, पदोन्नति और अन्य सभी रिकॉर्ड पहले से ही विभागीय कार्यालयों और डिजिटल डेटाबेस में उपलब्ध हैं। ऐसे में हर साल वही जानकारी दोबारा भरवाना समय और संसाधनों की बर्बादी है। हाल ही में हुई तबादला प्रक्रिया में भी रिकॉर्ड उपलब्ध होने के बावजूद कई विसंगतियां सामने आईं, जिससे डेटा की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा।
शिक्षक संगठनों ने इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए शिक्षा निदेशालय, बीकानेर को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- केवल बदली हुई जानकारी ही शिक्षकों से अपडेट करवाई जाए।
- रिकॉर्ड के सत्यापन का कार्य मंत्रालयिक कर्मचारियों द्वारा किया जाए।
- शाला दर्पण पोर्टल को पूरे साल खुला रखा जाए ताकि शिक्षक अपनी सुविधानुसार कार्य कर सकें।
- भविष्य में जुलाई, अगस्त और सितंबर जैसे महत्वपूर्ण शिक्षण महीनों में इस तरह के अतिरिक्त ऑनलाइन कार्य नहीं करवाए जाएं।
- प्रपत्र-10 जैसे रिकॉर्ड को मंत्रालयिक कर्मचारियों या शाला दर्पण प्रभारी से अपडेट कराया जाए।
इन मांगों और सुझावों पर शिक्षा विभाग क्या रुख अपनाता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। शिक्षकों को उम्मीद है कि उनकी समस्याओं को समझा जाएगा और अंतिम तिथि को 15 अगस्त तक बढ़ाया जाएगा ताकि वे बिना किसी दबाव के अपने शैक्षणिक दायित्वों का निर्वहन कर सकें।
📲 खबर पसंद आई?
अपने दोस्तों के साथ शेयर करें!

Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।