
राजस्थान के विद्यालयों में बाल संसद का बढ़ता महत्व: विद्यार्थियों में लोकतांत्रिक चेतना
Posted on 2 अगस्त 2026
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नागौर, 2 अगस्त 2026: राजस्थान के सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए बाल संसद का गठन एक महत्वपूर्ण पहल बन गया है। यह प्रक्रिया छात्रों को छोटी उम्र से ही शासन-प्रशासन की बारीकियों से परिचित कराती है, उन्हें भविष्य के जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में एक सशक्त कदम है। हमारी टीम को मिली जानकारी के अनुसार, गत शनिवार को आहोर उपखंड क्षेत्र के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय उखरड़ा में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत बाल संसद का गठन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
गुप्त मतदान से चुने गए प्रतिनिधि
इस प्रक्रिया में विद्यार्थियों ने स्वयं अपने प्रतिनिधियों का चुनाव गुप्त मतदान के जरिए किया। यह ठीक वैसे ही था जैसे एक वयस्क नागरिक अपने सांसद या विधायक का चुनाव करता है। इस पूरी प्रक्रिया ने न केवल छात्रों को मतदान के महत्व से अवगत कराया, बल्कि उन्हें एक निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रणाली का अनुभव भी दिया। इस निर्वाचन में कक्षा 8 की छात्रा मापिया कुमारी को बाल प्रधानमंत्री और कक्षा 8 के छात्र जीवाराम को बाल उपप्रधानमंत्री के रूप में चुना गया। यह विद्यार्थियों के बीच से ही नेतृत्व के उभरने का एक शानदार उदाहरण है।
विभिन्न विभागों के मंत्री भी चुने गए
बाल संसद केवल प्रधानमंत्री और उपप्रधानमंत्री तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसमें विभिन्न विभागों के लिए मंत्री भी चुने जाते हैं। उखरड़ा विद्यालय में स्वास्थ्य, जल, बागवानी, शिक्षा, सांस्कृतिक और खेल मंत्री सहित अन्य महत्वपूर्ण विभागों के लिए विद्यार्थियों का चयन किया गया। ये मंत्री अपने-अपने विभाग से संबंधित छोटे-मोटे मुद्दों पर ध्यान देते हैं और विद्यालय प्रशासन के साथ मिलकर समाधान खोजने का प्रयास करते हैं। उदाहरण के लिए:
- स्वास्थ्य मंत्री: विद्यालय में स्वच्छता, प्राथमिक उपचार की व्यवस्था और स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन।
- जल मंत्री: पीने के पानी की उचित व्यवस्था, जल संरक्षण के उपाय और पानी की बर्बादी रोकने पर ध्यान।
- बागवानी मंत्री: विद्यालय परिसर में हरियाली बढ़ाना, पेड़-पौधों की देखभाल और पर्यावरण संरक्षण।
- शिक्षा मंत्री: सहपाठी शिक्षण को बढ़ावा देना, पढ़ाई में आने वाली समस्याओं पर चर्चा और समाधान।
- सांस्कृतिक मंत्री: विद्यालय में सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन, पर्वों और त्योहारों को उत्साह से मनाना।
- खेल मंत्री: खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन, खेल सुविधाओं में सुधार और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा।
नेतृत्व विकास और लोकतांत्रिक चेतना का पाठ
इस पूरी प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता विकसित करना और उन्हें लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जागरूक बनाना है, जैसा कि विद्यालय प्रधानाध्यापक गोपाराम देवासी ने बताया। बीकानेर निदेशालय और जयपुर सचिवालय भी इस तरह की पहलों को लगातार प्रोत्साहित करते रहे हैं ताकि नई पीढ़ी में नागरिक बोध और जिम्मेदारी की भावना जागृत हो। बाल संसद के माध्यम से छात्र न केवल अपनी आवाज उठाना सीखते हैं, बल्कि वे दूसरों की बात सुनना, सहमति बनाना और सामूहिक निर्णय लेना भी सीखते हैं। यह अनुभव उन्हें भविष्य में एक सशक्त और जागरूक नागरिक के रूप में तैयार करता है, जो समाज और राष्ट्र के विकास में सक्रिय भूमिका निभा सके।
हमारी टीम का मानना है कि राजस्थान के सभी विद्यालयों में बाल संसद का यह मॉडल अपनाया जाना चाहिए। इससे विद्यार्थियों में न केवल पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ेगी, बल्कि वे विद्यालय को अपना मानकर उसकी बेहतरी के लिए काम करेंगे। यह पहल राजस्थान के शिक्षा क्षेत्र में एक सकारात्मक बदलाव लाने में सक्षम है।
हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, यह मॉडल नागौर जिले के विद्यालयों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण है, जिससे यहां के छात्र-छात्राएं भी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को नजदीक से समझ सकें।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।