
नागौर के स्कूलों में पर्यावरण संरक्षण की नई पहल, छात्रों ने किया पौधारोपण
Posted on 2 अगस्त 2026
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नागौर जिले के सरकारी विद्यालयों में पर्यावरण संरक्षण और हरित आवरण बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में, वीरवाड़ा नाथवास पुलिया के पास स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय नाथवास वीरवाड़ा में छात्रों ने एक वृहद पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य न केवल विद्यालय परिसर को हरा-भरा बनाना है, बल्कि नई पीढ़ी में पर्यावरण के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना को भी विकसित करना है।
पर्यावरण शिक्षा: पाठ्यक्रम का अभिन्न अंग
शिक्षा विभाग, बीकानेर निदेशालय के निर्देशों के अनुरूप, विद्यालयों में पर्यावरण शिक्षा को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रखकर, उसे व्यावहारिक रूप देने पर जोर दिया जा रहा है। पौधारोपण जैसे कार्यक्रम इसी दिशा में महत्वपूर्ण हैं। हमारी टीम ने पाया कि बच्चे इस गतिविधि में बड़े उत्साह के साथ शामिल हुए। उन्होंने विभिन्न प्रकार के छायादार और फलदार पौधे लगाए, जिससे न केवल स्कूल परिसर की सुंदरता बढ़ेगी, बल्कि भविष्य में छात्रों को ताजी हवा और स्वच्छ वातावरण भी मिलेगा।
हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, इस कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों ने प्रकृति के साथ जुड़ने और उसके संरक्षण के महत्व को करीब से समझा। यह एक ऐसा अनुभव है जो उन्हें जीवनभर याद रहेगा और पर्यावरण के प्रति उनकी संवेदनशीलता को बढ़ाएगा। विद्यालयों में ऐसे कार्यक्रम आयोजित करना छात्रों को पर्यावरण संबंधी चुनौतियों और उनके समाधानों से अवगत कराने का एक प्रभावी तरीका है।
राज्य सरकार की हरित राजस्थान परिकल्पना
जयपुर सचिवालय से जारी दिशा-निर्देशों में भी 'हरित राजस्थान' की परिकल्पना को साकार करने पर जोर दिया गया है। विद्यालयों को इस अभियान में महत्वपूर्ण भागीदार माना जा रहा है। पौधारोपण कार्यक्रम इसी वृहद अभियान का एक हिस्सा है, जिसमें छात्रों को पर्यावरण प्रहरी के रूप में तैयार किया जा रहा है। ये नन्हे पौधे केवल वृक्ष ही नहीं, बल्कि भविष्य के पर्यावरण प्रेमियों और जिम्मेदार नागरिकों की नींव भी हैं।
छात्रों और शिक्षकों का योगदान
- छात्रों की सक्रिय भागीदारी: बच्चों ने स्वयं गड्ढे खोदे, पौधे लगाए और उनकी देखभाल का संकल्प लिया। यह उन्हें स्वामित्व की भावना प्रदान करता है।
- छायादार और फलदार वृक्षों का चयन: लगाए गए पौधों में नीम, पीपल, आम, अमरूद जैसे वृक्ष शामिल थे, जो न केवल छाया प्रदान करेंगे बल्कि पौष्टिक फल भी देंगे।
- शिक्षण में व्यावहारिकता: शिक्षकों ने इस अवसर का उपयोग छात्रों को पौधों के महत्व, प्रकाश संश्लेषण और पारिस्थितिकी तंत्र के बारे में जानकारी देने के लिए किया।
शिक्षा विभाग लगातार ऐसे नवाचारी कार्यक्रमों को प्रोत्साहित कर रहा है जो छात्रों के सर्वांगीण विकास में सहायक हों। हमारा मानना है कि ऐसे कार्यक्रमों से बच्चे केवल किताबी ज्ञान तक ही सीमित नहीं रहते, बल्कि वे व्यावहारिक कौशल और सामाजिक जिम्मेदारियां भी सीखते हैं। यह पहल अन्य विद्यालयों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी और नागौर जिले में पर्यावरण संरक्षण की मुहिम को और गति प्रदान करेगी। भविष्य में ऐसे और कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है, जिससे जिले के सभी सरकारी विद्यालय हरे-भरे और जीवंत शिक्षा केंद्र बन सकें।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।