
नागौर: गुरु के सान्निध्य में ही संभव है साधना, आचार्य भगवानदास ने दी सीख
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हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, स्थानीय रामपोल सत्संग भवन में आयोजित चातुर्मास सत्संग सभा के दौरान आध्यात्मिक वातावरण का संचार हुआ। इस सभा को संबोधित करते हुए पुष्कर धाम के पीठाधीश्वर आचार्य भगवानदास ने भक्तों को जीवन में गुरु की महत्ता और साधना के सही मार्ग के बारे में विस्तार से समझाया।
आध्यात्मिक भ्रम से बचने की सलाह
आचार्य भगवानदास ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गुरु के सान्निध्य के बिना मोक्ष या साधना का मार्ग प्रशस्त नहीं हो सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि 'गुरु को छोड़कर सीधे भगवान को पकड़ने का दावा करना केवल एक आध्यात्मिक भ्रम है।' इस प्रकार की विचारधारा साधक को उसके मुख्य मार्ग से भटका देती है।
जीवन में राम नाम का महत्व
आचार्य ने एक सरल दृष्टांत देते हुए उपस्थित भक्तों को समझाया कि जैसे मानव शरीर की गरिमा और सुरक्षा के लिए वस्त्र अत्यंत आवश्यक हैं, ठीक उसी प्रकार मनुष्य के जीवन की सार्थकता के लिए 'राम नाम' का स्मरण अनिवार्य है। उनके अनुसार, नाम जप ही वह माध्यम है जो व्यक्ति को कठिन समय में संबल प्रदान करता है।
सत्संग में इनकी रही उपस्थिति
सत्संग के दौरान शहर के गणमान्य भक्त और साधु-संत उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मुख्य रूप से निम्नलिखित भक्त मौजूद थे:
- रामनामी महन्त मुरलीराम महाराज
- नंदकिशोर बजाज
- बुध प्रकाश कांगसिया
- केवलचंद दर्जी
- हीरालाल लक्ष्मीनारायण सोनी
- विजय कंसारा, महेश कंसारा तथा कांतिलाल
इस आयोजन ने क्षेत्र के लोगों में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया और चातुर्मास के दौरान सत्संग की निरंतरता को एक नई दिशा दी।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।