
नागौर के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी: अतरसूमा के ग्रामीणों ने दी ताला लगाने की चेतावनी
Posted on 3 अगस्त 2026
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हमारे जायल संवाददाता के अनुसार, शिक्षा के क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर स्थानीय स्तर पर आक्रोश बढ़ता जा रहा है। अतरसूमा स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में लंबे समय से चल रही शिक्षकों की कमी ने अब आंदोलन का रूप ले लिया है। सोमवार को ग्रामीणों और अभिभावकों ने एकजुट होकर उपखंड अधिकारी (SDM) को ज्ञापन सौंपते हुए प्रशासन को सात दिन का अल्टीमेटम दिया है।
शिक्षा की गुणवत्ता पर मंडराया संकट
ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय को क्रमोन्नत हुए चार साल बीत चुके हैं, लेकिन आज भी महत्वपूर्ण विषयों के व्याख्याता और वरिष्ठ अध्यापक के पद रिक्त हैं। छात्रों का भविष्य अंधकारमय होता देख अभिभावकों ने सीधे प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। ज्ञापन में जिन प्रमुख पदों की मांग की गई है, वे निम्नलिखित हैं:
- व्याख्याता स्तर: इतिहास, भूगोल और हिंदी साहित्य जैसे विषयों के पद आज तक सृजित नहीं हुए।
- वरिष्ठ अध्यापक स्तर: गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, हिंदी और अंग्रेजी जैसे अनिवार्य विषयों के पद लंबे समय से खाली हैं।
प्रशासन को दी कड़ी चेतावनी
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि बीकानेर निदेशालय और जयपुर सचिवालय के माध्यम से आगामी सात दिनों के भीतर रिक्त पदों को नहीं भरा गया, तो वे विद्यालय पर ताला लगाकर उग्र आंदोलन करेंगे। शिक्षा विभाग की इस लचर कार्यप्रणाली के कारण छात्रों को विषय विशेषज्ञ का मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनकी बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी बुरी तरह बाधित हो रही है।
क्या है शिक्षा विभाग का पक्ष?
शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार, किसी भी विद्यालय में पद सृजन और नियुक्ति की प्रक्रिया 'शाला दर्पण' पोर्टल पर उपलब्ध रिक्तियों और सरकार की स्टाफिंग पैटर्न नीति पर निर्भर करती है। अतरसूमा स्कूल की स्थिति को लेकर फिलहाल शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है। हालांकि, स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वे किसी भी सूरत में अपने बच्चों के भविष्य के साथ समझौता नहीं करेंगे और आंदोलन को तब तक जारी रखेंगे जब तक शिक्षक कार्यभार ग्रहण नहीं कर लेते।
ज्ञापन सौंपने के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जागरूक अभिभावकों ने प्रशासन से जल्द से जल्द सकारात्मक कदम उठाने की मांग की है। अब देखना यह है कि प्रशासन सात दिन की इस मियाद के भीतर क्या ठोस कदम उठाता है।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।
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