
राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बच्चों की थाली से दूध तक अब डिजिटल निगरानी, लापरवाहों पर गिरेगी गाज!
Posted on 3 अगस्त 2026
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हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले भोजन और दूध की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (पीएम पोषण/मिड-डे मील) और मुख्यमंत्री बाल गोपाल योजना के तहत अब खाद्यान्न और दूध पाउडर की खरीद से लेकर भंडारण, वितरण और उपयोग तक की पूरी प्रक्रिया पर डिजिटल माध्यम से कड़ी नजर रखी जाएगी। यह कदम बच्चों के स्वास्थ्य और योजनाओं की जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के लिए उठाया गया है।
शिक्षा विभाग आयुक्तालय, बीकानेर निदेशालय ने हाल ही में मिली शिकायतों को गंभीरता से लिया है। कई जिलों से पाउडर मिल्क के समय से पहले खराब होने, अवैध बिक्री, अनुचित भंडारण, खुले या क्षतिग्रस्त पैकेट स्वीकार करने और वितरण में गड़बड़ी जैसी गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं। इन शिकायतों के बाद सरकार ने पूरी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जिम्मेदार बनाने का निर्णय लिया है।
डिजिटल निगरानी और सख्त कार्रवाई का प्रावधान
नए निर्देशों के तहत, अब सिर्फ भोजन और दूध उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि प्रत्येक चरण की डिजिटल रिकॉर्डिंग और ऑनलाइन अपडेट अनिवार्य होगा। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही, अनियमितता या भ्रष्टाचार पाए जाने पर संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ), अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी, सीबीईओ, संस्था प्रधान और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
- 48 घंटे में जांच रिपोर्ट अनिवार्य: यदि किसी स्कूल में पाउडर मिल्क की बिक्री, गलत भंडारण, एक्सपायरी सामग्री के उपयोग या खराब दूध जैसी अनियमितता सामने आती है, तो इसकी सूचना तत्काल जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग को देनी होगी। संबंधित मामले की विस्तृत जांच कर 48 घंटे के भीतर आयुक्तालय को रिपोर्ट भेजना अनिवार्य होगा। जांच में लापरवाही या दोष सिद्ध होने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
- हर दाने-पैकेट की डिजिटल मॉनिटरिंग: पीएम पोषण योजना के तहत बच्चों की थाली तक पहुंचने वाले हर खाद्यान्न की अब डिजिटल निगरानी की जाएगी। स्कूलों को खाद्यान्न व दूध पाउडर की प्राप्ति, स्टॉक, वितरण और उपयोग का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन पोर्टल पर नियमित रूप से अपडेट करने के निर्देश दिए गए हैं। भविष्य में कागजी रिकॉर्ड के बजाय ऑनलाइन दर्ज जानकारी को ही प्रमाणिक माना जाएगा।
- अतिरिक्त स्टॉक पर रोक: स्कूलों को अनावश्यक रूप से अधिक मात्रा में दूध पाउडर या खाद्यान्न का भंडारण नहीं करना होगा। दूध पाउडर का अधिकतम 15 दिन की आवश्यकता के अनुसार ही स्टॉक रखा जा सकेगा। सामग्री प्राप्त होने के उसी दिन स्टॉक रजिस्टर और ऑनलाइन पोर्टल पर प्रविष्टि करना, वजन का सत्यापन तथा सुरक्षित और स्वच्छ स्थान पर भंडारण सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा।
- गुणवत्ता जांच और FEFO प्रणाली: स्कूलों में खाद्यान्न और दूध पाउडर प्राप्त करते समय संस्था प्रधान और प्रभारी की उपस्थिति में वीडियो रिकॉर्डिंग करना अनिवार्य किया गया है। खुले, फटे, गीले या क्षतिग्रस्त पैकेट किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किए जाएंगे और ऐसी सामग्री प्राप्त होने पर उसे तुरंत वापस भेजना होगा। साथ ही, सरकार ने स्कूलों में FEFO (First Expire, First Out) प्रणाली लागू करने के निर्देश दिए हैं, जिससे सामग्री के खराब होने या बर्बाद होने की संभावना कम होगी।
शिक्षा विभाग का स्पष्ट कहना है कि इन नए दिशा-निर्देशों का मुख्य उद्देश्य हमारे बच्चों को गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है। हमारी टीम इस पूरी प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए है ताकि प्रत्येक बच्चे को उसका हक मिल सके।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।