
रियां बड़ी: खेल बजट पर दो साल से ब्रेक, कैसे निखरेंगी स्कूली खेल प्रतिभाएं?
Posted on 1 अगस्त 2026
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हमारे रियां बड़ी संवाददाता के अनुसार, शिक्षा विभाग द्वारा 30 अगस्त से आयोजित होने वाली स्कूली खेलकूद प्रतियोगिताओं की घोषणा के बाद स्कूलों में तैयारियां तो शुरू हो गई हैं, लेकिन जमीनी हकीकत चिंताजनक बनी हुई है। जिले के अधिकांश राजकीय विद्यालयों में पिछले दो वर्षों से खेल मद की राशि जारी नहीं की गई है, जिसके चलते खिलाड़ियों की तैयारी पर सीधा असर पड़ रहा है।
संसाधनों का अभाव और शिक्षकों की चुनौती
खेल सामग्री के अभाव में शारीरिक शिक्षकों के लिए छात्रों को नियमित पूर्वाभ्यास कराना एक बड़ी चुनौती बन गया है। ग्रामीण अंचलों के स्कूलों में स्थिति और भी खराब है, जहां आवश्यक खेल उपकरण नदारद हैं। ऐसी स्थिति में शिक्षक भामाशाहों, ग्रामीणों और स्थानीय जनसहयोग के भरोसे खेल सामग्री जुटाने को मजबूर हैं।
मुख्य बिंदु: खेल बजट का संकट
- दो वर्षों से बजट शून्य: विभाग ने पिछले दो वर्षों से किसी भी विद्यालय को खेल मद की राशि आवंटित नहीं की है।
- प्रावधान और वास्तविकता: नियमानुसार प्राथमिक विद्यालयों को 5 हजार, उच्च प्राथमिक को 9 हजार और माध्यमिक/उच्च माध्यमिक विद्यालयों को 25 हजार रुपये का खेल बजट मिलना चाहिए।
- वर्ष 2025 का अनुभव: पिछले आवंटन के दौरान कई स्कूलों को ऐसी खेल सामग्री भेजी गई, जिनकी उन्हें आवश्यकता ही नहीं थी, जबकि जरूरी उपकरण नहीं मिलने से बजट का सही उपयोग नहीं हो सका।
शिक्षकों का दर्द
इस विषय पर राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय की शारीरिक शिक्षिका फिरदोस बानो का कहना है कि, 'पिछले दो वर्षों से खेल मद की राशि नहीं मिलने के कारण जरूरी उपकरण खरीदना लगभग असंभव हो गया है। प्रतियोगिताएं सिर पर हैं, लेकिन संसाधनों के अभाव में खिलाड़ी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं। सरकार को इस मामले में त्वरित निर्णय लेते हुए खेल बजट जारी करना चाहिए।'
फिलहाल, सरकारी स्कूलों के मेधावी खिलाड़ी सीमित संसाधनों के बावजूद संघर्ष करते हुए अपनी प्रतिभा को निखारने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन खेलकूद के प्रोत्साहन के लिए विभागीय बजट की राह अब भी बनी हुई है।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।
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