
नागौर में हाईवोल्टेज लाइन परियोजना पर किसानों का उग्र विरोध: कलेक्टर को ज्ञापन
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नागौर: जिले में प्रस्तावित हाईवोल्टेज ट्रांसमिशन लाइन परियोजना को लेकर किसानों का विरोध एक बार फिर तेज हो गया है। आज मंगलवार को किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर परियोजना के निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। किसानों ने प्रशासन से परियोजना से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने, प्रभावित भूमि के लिए उचित मुआवजा देने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।
हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, किसानों का आरोप है कि इस ट्रांसमिशन लाइन का निर्माण कई निजी कंपनियों द्वारा किया जा रहा है। इन कंपनियों पर आरोप है कि वे सरकारी कार्य का हवाला देकर सीधे खेतों में काम शुरू कर रही हैं, जबकि परियोजना से प्रभावित होने वाले किसानों को न तो परियोजना से जुड़े दस्तावेज, न ही स्वीकृतियों की जानकारी और न ही पूरी प्रक्रिया के बारे में सूचित किया गया है। किसानों में इस अनदेखी और मनमानी को लेकर गहरा असंतोष व्याप्त है, जिसके चलते उन्होंने विरोध का यह कदम उठाया है।
आवश्यक दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग
किसानों ने अपने ज्ञापन में कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों की प्रतियां तुरंत उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि वे परियोजना की वैधता और प्रभावों को समझ सकें। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
- भारत सरकार और राजस्थान सरकार द्वारा जारी परियोजना की स्वीकृतियां।
- परियोजना से संबंधित राजपत्र प्रकाशन की प्रतियां।
- स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) की विस्तृत जानकारी।
- परियोजना का सटीक रूट मैप।
- गूगल अर्थ की केएमजेड (KMZ) फाइल, जिससे प्रभावित क्षेत्रों का सही आकलन हो सके।
- परियोजना से संबंधित अन्य सभी आवश्यक दस्तावेज।
- स्थानीय समाचार पत्रों में प्रकाशित परियोजना की सूचनाओं की प्रतियां।
मुआवजे पर असंतोष और न्यायपूर्ण भुगतान की मांग
किसानों ने स्पष्ट आरोप लगाया है कि कंपनियां केवल व्यावसायिक लाभ के लिए उनकी उपजाऊ कृषि भूमि का उपयोग कर रही हैं। ऐसे में, प्रभावित भूमि के लिए वर्तमान व्यावसायिक बाजार दर के आधार पर मुआवजा तय किया जाना चाहिए। ज्ञापन में प्रमुखता से मांग की गई है कि:
- ट्रांसमिशन टावर और कॉरिडोर से प्रभावित होने वाली भूमि के लिए बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा दिया जाए।
- सभी प्रभावित किसानों को समान दर से और बिना किसी भेदभाव के मुआवजा भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
- खेतों में निर्माण कार्य तभी शुरू किया जाए, जब प्रभावित किसानों को पूरा मुआवजा अग्रिम रूप से भुगतान कर दिया जाए।
- जब तक किसानों के सभी विवादित मुद्दों का समाधान नहीं हो जाता, तब तक परियोजना का कार्य पूरी तरह से रोक दिया जाए।
संयुक्त शिकायत निवारण समिति की आवश्यकता
किसानों ने इस पूरे मामले में पारदर्शिता और त्वरित समाधान के लिए एक संयुक्त शिकायत निवारण समिति गठित करने की भी मांग की है। उन्होंने सुझाव दिया है कि इस समिति में प्रशासनिक अधिकारी, ट्रांसमिशन लाइन कंपनी के अधिकारी और प्रभावित किसानों के प्रतिनिधि शामिल होने चाहिए। यह समिति मौके पर जाकर विवादित मामलों का सत्यापन कर निष्पक्ष निर्णय ले सकेगी, जिससे किसानों को न्याय मिल सके।
इसके अतिरिक्त, किसानों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि अगले 15 दिनों के भीतर ट्रांसमिशन लाइन निर्माण कर रही कंपनियों के डीजीएम या सीजीएम स्तर के अधिकारियों और किसान प्रतिनिधियों के बीच जिला कलेक्टर की मौजूदगी में एक वार्ता आयोजित की जाए। इस बैठक का उद्देश्य सभी लंबित मुद्दों का समाधान निकालना और परियोजना में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करना होगा। हमारी टीम इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर लगातार नज़र बनाए हुए है और किसानों की चिंताओं को प्रमुखता से उठाती रहेगी।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।