
राजस्थान में स्मार्ट क्लास का 'ऑफलाइन' सच: 300 करोड़ खर्च, पर स्कूलों में बिजली-नेट का टोटा
Posted on 7 अगस्त 2026
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हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, राजस्थान के सरकारी स्कूलों को डिजिटल बनाने का सपना फिलहाल जमीनी हकीकत के सामने दम तोड़ता नजर आ रहा है। शिक्षा विभाग के दावों और स्कूलों की वास्तविक स्थिति के बीच बड़ा फासला है। प्रदेश के 14,125 स्कूलों में करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से 18,135 स्मार्ट क्लास रूम स्थापित किए गए, लेकिन अधिकांश जगहों पर ये आधुनिक उपकरण महज दिखावट बनकर रह गए हैं।
डिजिटल शिक्षा की राह में रोड़े
- बुनियादी सुविधाओं का अभाव: कई स्कूलों में स्मार्ट एलईडी पैनल धूल फांक रहे हैं क्योंकि वहां बिजली की नियमित आपूर्ति और इंटरनेट कनेक्टिविटी का नामोनिशान नहीं है।
- प्रशिक्षण की कमी: उपकरणों के इंस्टॉलेशन के बावजूद, शिक्षकों को इनके प्रभावी संचालन के लिए जरूरी तकनीकी प्रशिक्षण नहीं दिया गया है।
- संरचनात्मक बाधाएं: कई स्कूलों में कमरे जर्जर हैं या बैठने की उचित व्यवस्था नहीं है, जिससे स्मार्ट बोर्ड का उपयोग करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
क्या कहती है जमीनी हकीकत?
हमारी टीम की पड़ताल में सामने आया कि कहीं स्मार्ट बोर्ड चादरों से ढके पड़े हैं, तो कहीं बच्चों की पीठ के पीछे दीवार पर टंगे हैं। कई प्राचार्य का कहना है कि बिजली की बार-बार कटौती और इंटरनेट रिचार्ज की समस्या के कारण डिजिटल कंटेंट के जरिए पढ़ाना असंभव सा हो गया है। बीकानेर निदेशालय और जयपुर सचिवालय स्तर पर भले ही बड़े बजट पास किए गए हों, लेकिन जब तक स्कूलों का ढांचागत सुधार (Infrastructure) नहीं होगा, तब तक डिजिटल इंडिया की यह पहल कागजी बनकर रह जाएगी।
शिक्षा विभाग के लिए चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल हार्डवेयर खरीद लेने से शिक्षा का स्तर नहीं सुधरेगा। बच्चों को स्मार्ट तरीके से पढ़ाने के लिए यह अनिवार्य है कि स्कूलों में बिजली का स्थायी कनेक्शन हो और तकनीकी सहायकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। अभिभावकों और शिक्षकों का कहना है कि सरकार को अब केवल बजट आवंटित करने के बजाय मॉनिटरिंग पर जोर देना चाहिए ताकि लाखों विद्यार्थियों का भविष्य 'ऑफलाइन' न रहे।
उम्मीद है कि आने वाले दिनों में विभाग इन कमियों को दूर कर स्मार्ट क्लास रूम को पुनः सक्रिय करने के लिए कोई ठोस कार्ययोजना तैयार करेगा।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।