
खेल प्रशिक्षकों का वेतन रुका: 500+ कोचों की भर्ती पर सवाल
Posted on 25 जुलाई 2026
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जयपुर: राजस्थान राज्य क्रीड़ा परिषद (Sports Council) इन दिनों वित्तीय संकट से जूझ रही है। एक तरफ जहां अनुबंध (contract) पर कार्यरत प्रशिक्षकों (coaches) का कार्यकाल चार महीने से अधिक समय से नवीनीकृत (renew) नहीं हुआ है, वहीं दूसरी ओर, सेवानिवृत्ति के बाद पुनर्नियुक्ति पर रखे गए 16 प्रशिक्षकों और एक खेल अधिकारी को पिछले तीन महीनों से वेतन का भुगतान नहीं किया गया है। यह स्थिति खेल प्रतिभाओं के प्रशिक्षण और विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है।
अनुबंध नवीनीकरण की अनिश्चितता
अनुबंध पर लगे कई कोचों का कार्यकाल नवीनीकृत नहीं होने के बावजूद सवाई मानसिंह स्टेडियम और अन्य प्रशिक्षण स्थलों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सूत्रों से यह भी जानकारी मिल रही है कि इनमें से कुछ कोच छात्रों से फीस भी वसूल रहे हैं। इस बारे में पूछे जाने पर क्रीड़ा परिषद के सचिव राजकेश मीणा ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है और यदि ऐसा हो रहा है तो वे जांच करवाएंगे।
पुनर्नियुक्त कोचों के वेतन पर प्रश्नचिह्न
सेवानिवृत्ति के बाद पुनर्नियुक्ति पर रखे गए 16 कोचों और एक खेल अधिकारी का एक साल का कार्यकाल होता है। इनमें से सबल प्रताप और शकील हुसैन जैसे प्रशिक्षकों का कार्यकाल इसी महीने समाप्त हो गया है। इन सभी पुनर्नियुक्त प्रशिक्षकों को पिछले तीन महीनों से वेतन नहीं मिला है। अधिकारियों का कहना है कि उनके काम का मूल्यांकन किया जा रहा है, जिसके कारण वेतन भुगतान में देरी हो रही है।
500+ कोचों की भर्ती पर बड़ा सवाल
क्रीड़ा परिषद 500 से अधिक अनुबंध कोचों की नियुक्ति पर विचार कर रही है, जिसकी जिम्मेदारी खेल अधिकारी करण सिंह को सौंपी गई है। नियमानुसार, इस पद के लिए अंतर्राष्ट्रीय पदक विजेता, अंतर्राष्ट्रीय प्रतिभागी, राष्ट्रीय पदक विजेता या एनआईएस (NIS) योग्य होना आवश्यक है। इन योग्यताओं वाले अधिकांश अभ्यर्थी पहले से ही सरकारी या निजी नौकरियों में नियुक्त हो जाते हैं। ऐसे में, इतने बड़े पैमाने पर योग्य कोचों की भर्ती कैसे संभव होगी, यह एक बड़ा प्रश्न है।
अधिकारियों का पक्ष
क्रीड़ा परिषद के सचिव राजकेश मीणा ने स्पष्ट किया, "मुझे इस बात की जानकारी नहीं है कि बिना अनुबंध नवीनीकरण के कोच काम कर रहे हैं और बच्चों से फीस ले रहे हैं। मैं इसकी जांच करवाऊंगा। पुनर्नियुिक्त कोचों के वेतन भुगतान में देरी के संबंध में, उनके काम का मूल्यांकन किया जा रहा है।"
यह स्थिति प्रदेश में खेल के माहौल और प्रशिक्षकों के मनोबल पर गहरा असर डाल रही है, और इस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।