
राजस्थान में 'मिशन-पढ़ो' अभियान का आगाज: छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की नई पहल
Posted on 29 जुलाई 2026
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नागौर, 29 जुलाई 2026: राजस्थान में शिक्षा के स्तर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और विद्यार्थियों में पठन संस्कृति विकसित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। राज्य भर में 'मिशन-पढ़ो राजस्थान' के तहत रीडिंग प्रमोशन कैंपेन 2026-27 का विधिवत शुभारंभ कर दिया गया है। हमारी टीम को मिली जानकारी के अनुसार, इस अभियान का मुख्य लक्ष्य छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों को एक साझा मंच पर लाकर पढ़ने की आदत को प्रोत्साहित करना है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता में समग्र सुधार हो सके।
हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, हालांकि इस अभियान की राज्य स्तरीय शुरुआत सलूंबर से हुई है, लेकिन इसका असर और क्रियान्वयन पूरे राजस्थान के विद्यालयों, विशेषकर नागौर जिले के सभी शैक्षणिक संस्थानों में देखने को मिलेगा। शिक्षा विभाग, बीकानेर निदेशालय के निर्देशानुसार, यह अभियान एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है जो विद्यार्थियों को न केवल पाठ्यक्रम तक सीमित रखेगा, बल्कि उन्हें जीवन भर सीखने के लिए प्रेरित करेगा।
'रीड-ए-थॉन' से हुई अभियान की शुरुआत
इस अभियान का शुभारंभ 'रीड-ए-थॉन' नामक एक विशेष सामूहिक पठन गतिविधि के साथ हुआ। इसमें शिक्षक, विद्यार्थी और अभिभावक, सभी ने लगभग 30 मिनट तक एक साथ बैठकर विभिन्न पुस्तकों का अध्ययन किया। यह गतिविधि एक प्रेरणादायक दृश्य था, जहाँ शिक्षा और संस्कार का अनूठा संगम देखने को मिला। इस दौरान सभी सहभागियों ने 'हर दिन पढ़ेंगे-हर दिन बढ़ेंगे' का सामूहिक संकल्प लिया। यह संकल्प नियमित पठन को दैनिक दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बनाने का संदेश देता है, जिससे बच्चों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।
पढ़ने की आदत के बहुआयामी लाभ
शिक्षकों ने इस अवसर पर विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए बताया कि पढ़ने की आदत केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह जीवनभर सीखने और निरंतर प्रगति करने की एक सशक्त शक्ति है। नियमित पुस्तक पठन से निम्नलिखित महत्वपूर्ण लाभ प्राप्त होते हैं:
- भाषा कौशल का विकास: नए शब्दों और वाक्यों की समझ बढ़ती है।
- अभिव्यक्ति की क्षमता में वृद्धि: विचारों को स्पष्टता से व्यक्त करने की कला विकसित होती है।
- कल्पनाशक्ति का विस्तार: विभिन्न कहानियों और विचारों से कल्पना की उड़ान बढ़ती है।
- आत्मविश्वास में बढ़ोतरी: ज्ञानार्जन से आत्मविश्वास का स्तर ऊपर उठता है।
- तार्किक सोच का विकास: समस्याओं का विश्लेषण करने और समाधान खोजने की क्षमता बढ़ती है।
विद्यार्थियों को विशेष रूप से विद्यालय पुस्तकालयों का अधिकतम उपयोग करने और प्रतिदिन पढ़ने के लिए कुछ समय निकालने के लिए प्रेरित किया गया। यह सुनिश्चित करेगा कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण पठन सामग्री आसानी से उपलब्ध हो सके।
अभिभावकों की भूमिका है महत्वपूर्ण
शिक्षा विभाग ने इस अभियान की सफलता के लिए अभिभावकों से भी सक्रिय सहयोग की अपील की है। कार्यक्रम में उपस्थित अभिभावकों से आग्रह किया गया कि वे घरों में बच्चों के लिए एक सकारात्मक अध्ययन का माहौल तैयार करें। इसके अतिरिक्त, उन्हें प्रतिदिन बच्चों के साथ कुछ समय बैठकर पुस्तक पढ़ने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया। शिक्षकों का मानना है कि विद्यालय और परिवार के संयुक्त एवं समन्वित प्रयासों से ही बच्चों में एक सुदृढ़ पठन संस्कृति को विकसित किया जा सकता है। यह सहयोग ही बच्चों को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने और बेहतर नागरिक बनने में सक्षम बनाएगा। इस अभियान से निश्चित रूप से राजस्थान के शैक्षणिक परिदृश्य में एक सकारात्मक बदलाव आएगा, जिससे विद्यार्थी अधिक सशक्त और ज्ञानी बनेंगे।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।