
नागौर के नेशनल-स्टेट हाइवे किनारे निर्माण पर सुप्रीम सख्ती: 40 मीटर के दायरे में सब अवैध
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हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के एक कड़े फैसले और राज्य सरकार के आदेश के बाद जिले भर के तमाम नेशनल और स्टेट हाइवे की तस्वीर बदलने जा रही है। अब राजमार्गों के सेंटर पॉइंट से दोनों तरफ 40 मीटर तक के दायरे में किसी भी प्रकार के निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
क्या है नया आदेश और इसका प्रभाव
फलोदी सड़क हादसे के बाद फरवरी 2026 में राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा लिए गए स्वतः संज्ञान और उसके बाद अप्रैल 2026 में सुप्रीम कोर्ट के संशोधित आदेशों के चलते यह कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। नागौर जिले में कुल 1281 किलोमीटर लंबी 26 सड़कों पर इसका सीधा असर पड़ेगा, जिसमें एनएच 62, 58 और 458 की 5 सड़कें (395 किमी) और स्टेट हाईवे की 21 सड़कें (887 किमी) शामिल हैं।
निर्माणाधीन क्षेत्रों का वर्गीकरण
- 0 से 40 मीटर (पूर्ण प्रतिबंधित जोन): इसे पूरी तरह 'नो-कंस्ट्रक्शन जोन' घोषित कर दिया गया है। यहां न तो कोई नया मकान बन सकेगा और न ही दुकान या ढाबा। इस दायरे में पहले से मौजूद निर्माणों को भी अवैध की श्रेणी में माना जाएगा।
- 40 से 75 मीटर (व्यावसायिक प्रतिबंध जोन): इस दायरे में आवासीय निर्माण की अनुमति संभव हो सकती है, लेकिन 75 मीटर तक किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि (कमर्शियल एक्टिविटी) पर पूर्ण रोक लगा दी गई है।
जमीन के दामों में भारी गिरावट की संभावना
राजस्व विभाग ने इन निर्देशों की पालना सुनिश्चित करने के लिए सभी जिला कलेक्टर्स को पत्र जारी कर हाइवे किनारे की जमीनों के लैंड कन्वर्जन पर अगले आदेश तक पूरी तरह रोक लगा दी है। इस फैसले से उन लोगों को बड़ा आर्थिक नुकसान हो रहा है जिन्होंने हाइवे किनारे जमीनों में निवेश किया था। जानकारों के अनुसार, 75 मीटर के दायरे में संचालित सैकड़ों व्यावसायिक प्रतिष्ठान अब अस्तित्व के संकट का सामना कर रहे हैं, जिससे इन इलाकों में जमीन की कीमतों में भारी गिरावट आना तय है।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।