
जोधपुर में वक्फ संपत्ति का बड़ा खुलासा, सरकारी भूमि पर बने बंगलों, मंदिरों पर सवाल
Posted on 27 जुलाई 2026
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हमारे **नागौर** संवाददाता के अनुसार, जोधपुर में सरकारी भूमि से जुड़े एक बड़े मामले में सनसनीखेज खुलासा हुआ है। ग्राम जोधपुर के खसरा नंबर 482, 485 और 490, जो कि राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार निगम के स्वामित्व में हैं, की 129 बीघा से अधिक भूमि को वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज कर लिया गया है। इस सरकारी भूमि पर अब दो न्यायाधीशों के बंगले, एक प्रमुख धार्मिक स्थल गीता भवन, सोहनलाल मनिहार स्कूल, शाह गोवर्धन कॉलेज, चार मंदिर और दो न्याति भवन सहित बड़ा आवासीय व व्यावसायिक क्षेत्र शामिल है।
यह मामला तब प्रकाश में आया जब उम्मीद पोर्टल पर इन संपत्तियों को वक्फ संपत्ति के रूप में सूचीबद्ध पाया गया, जिसकी प्रविष्टि वक्फ गजट में भी अंकित है। प्राथमिक राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार, ये संपत्तियां निगम के नाम दर्ज हैं, लेकिन वक्फ गजट में इन्हें अलग तरह से दर्ज किया गया है।
गड़बड़ी के स्तर और ऐतिहासिक संदर्भ
जांच में सामने आया है कि यह प्रक्रिया बिना मुतवल्ली की देखरेख के संपन्न हुई है। भूमि स्वामित्व का प्राथमिक रिकॉर्ड हमेशा जमाबंदी और रिकॉर्ड ऑफ राइट्स को माना जाता है। इस मामले में एक बड़ा सवाल यह उठता है कि वक्फ प्रविष्टि में अपलोड की गई संपत्तियों की जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की गई।
ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स के अनुसार, स्वतंत्रता से पूर्व वक्फ से संबंधित कानून बनाए गए थे। तुंवरजी का झालरा, जिसका निर्माण लगभग 250 साल पहले महाराजा अभय सिंह राठौर के शासनकाल में हुआ था, उसे भी 1965 में 'झालरा फॉर ताजिया' के रूप में वक्फ संपत्ति में दर्ज कर दिया गया। यह खुलासा 61 साल बाद हुआ है, जिससे इस प्राचीन पर्यटक स्थल के स्वामित्व पर भी प्रश्नचिन्ह लग गया है।
विवादित संपत्तियों का विवरण
जमाबंदी में ग्राम जोधपुर के खसरा नंबर 490 की 36.01 बीघा जमीन निगम के नाम दर्ज है, जिसका नामांतरण 12 मार्च 2016 को हुआ था। इस खसरे की किस्म 'कब्रिस्तान' दर्ज है, जबकि यहां घनी आबादी और कई महत्वपूर्ण संपत्तियां स्थित हैं। इसमें दो न्यायाधीशों, विनीत माथुर और प्रकाश टाटिया के बंगले, गीता भवन, सोहनलाल मनिहार स्कूल, शाह गोवर्धनलाल काबरा कॉलेज, काबरा मातुश्री कला मंदिर, अग्रवालों की बगीची, अग्रवाल महावीर मंदिर, सतगुरु कबीर आश्रम और गीतेश्वर महादेव मंदिर शामिल हैं।
इसी तरह, खसरा नंबर 482 (37.06 बीघा) और खसरा नंबर 485 (74.11 बीघा) भी निगम के नाम दर्ज हैं और इनकी किस्म 'कब्रिस्तान' बताई गई है। इन दोनों ही खसरों में आबादी के बड़े हिस्से को वक्फ संपत्ति में दर्ज कर दिया गया है। खसरा नंबर 485 में मारू लोहार सिकलीगरों का मंदिर और खसरा नंबर 482 में जीनगर न्याति बगीची (सिवांची गेट) भी वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज हैं।
अधिकारियों की प्रतिक्रिया
इस मामले पर वक्फ बोर्ड के सीईओ, अबु सूफियान ने स्वीकार किया है कि गीता भवन 1965 के गजट में शामिल है। उन्होंने बताया कि 595 संपत्तियों में से 571 को बोर्ड के अप्रूवर स्तर से अप्रूव्ड किया जा चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि निजी खातेदारी दर्ज होगी तो उसे रिजेक्ट किया जाएगा, लेकिन चूंकि खसरा सरकार का है और किस्म कब्रिस्तान है, इसलिए वे सीधे तौर पर इसे रिजेक्ट नहीं कर सकते। आगे की जांच जारी है।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।