
राजस्थान स्टेट ओपन: सिलेबस की दुविधा, एनआईओएस पर निर्भरता जारी
Posted on 27 जुलाई 2026
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जयपुर: राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल (RSOS) के लिए अपना स्वयं का पाठ्यक्रम विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना एक बार फिर अधूरी रह गई है। इस साल भी, राज्य के एक लाख से अधिक दसवीं और बारहवीं कक्षा के विद्यार्थी राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) के पाठ्यक्रम पर ही निर्भर रहेंगे। यह निर्णय उन विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण है जो आगामी सत्रों की तैयारी कर रहे हैं।
सिलेबस के निर्माण में देरी का कारण
RSOS ने स्वयं का सिलेबस तैयार करने के प्रयास में प्रदेश के सरकारी विश्वविद्यालयों से विषय विशेषज्ञों की सहायता मांगी थी, लेकिन अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद, राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) से उनके पाठ्यक्रम को अपनाने का प्रयास किया गया। हालाँकि, RBSE ने स्पष्ट किया कि वे वर्तमान में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) के पाठ्यक्रम का पालन कर रहे हैं और अपना पाठ्यक्रम साझा नहीं कर सकते। इन कवायदों में काफी समय बीत जाने के कारण, RSOS के पास एनआईओएस के पाठ्यक्रम को अपनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
आर्थिक और शैक्षिक प्रभाव
अपने स्वयं के पाठ्यक्रम के अभाव में, RSOS को एनआईओएस को कॉपीराइट शुल्क के रूप में लगभग 25 लाख रुपये का भुगतान करना होगा। यह वित्तीय बोझ चिंता का विषय है, खासकर जब इस राशि का उपयोग राज्य के शैक्षिक विकास के लिए किया जा सकता है।
राज्य-विशिष्ट पाठ्यक्रम की आवश्यकता
एनआईओएस के वर्तमान पाठ्यक्रम में राजस्थान की कला, संस्कृति और इतिहास से संबंधित विषयों का अभाव है, जो राज्य के विद्यार्थियों के लिए कम उपयोगी साबित हो सकता है। एक स्वदेशी पाठ्यक्रम राजस्थान की विशिष्ट पहचान को संरक्षित करने और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विद्यार्थियों को बेहतर ढंग से तैयार करने में सहायक होता।
भविष्य की राह
RSOS सचिव अरुणा शर्मा के अनुसार, स्वयं का सिलेबस तैयार करने का मामला अब अगले वर्ष के लिए टाल दिया गया है। यह बार-बार होने वाला विलंब शिक्षा क्षेत्र में योजनाबद्ध कार्यान्वयन की कमी को दर्शाता है।
विद्यार्थियों के लिए मुख्य बिंदु:
- पाठ्यक्रम: इस शैक्षणिक वर्ष के लिए एनआईओएस का पाठ्यक्रम ही मान्य रहेगा।
- परीक्षाएं: दसवीं और बारहवीं की परीक्षाएं एनआईओएस के पाठ्यक्रम के अनुसार आयोजित की जाएंगी।
- वित्तीय बोझ: एनआईओएस को कॉपीराइट शुल्क के रूप में 25 लाख रुपये का भुगतान किया जाएगा।
- भविष्य की योजना: स्वयं का पाठ्यक्रम बनाने की प्रक्रिया अगले वर्ष तक के लिए स्थगित कर दी गई है।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।