
राजस्थान के विश्वविद्यालयों में राजस्थानी भाषा अनिवार्य करने की उठी मांग, सरकार को भेजा प्रस्ताव
Posted on 19 जुलाई 2026
Listen News
Audio Summary
हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, राजस्थान के शैक्षणिक गलियारों में अपनी मातृभाषा को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष यशपाल सिंह कुम्पावत ने प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में राजस्थानी भाषा को न केवल संरक्षण देने, बल्कि इसे अनिवार्य अध्ययन और शोध का विषय बनाने की पुरजोर मांग की है।
राजस्थानी भाषा के लिए संवैधानिक मान्यता की मांग
कुम्पावत ने केंद्र और राज्य सरकार से आग्रह किया है कि राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाए। उनका तर्क है कि राजस्थान का गौरवशाली इतिहास और समृद्ध लोक साहित्य तभी जीवित रह सकता है जब इसे संवैधानिक स्तर पर मान्यता मिले। इसके लिए उन्होंने निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया है:
- राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में राजस्थानी भाषा के विशेष अध्ययन और शोध केंद्र खोले जाएं।
- नई पीढ़ी तक सांस्कृतिक धरोहर को पहुंचाने के लिए पाठ्यक्रम में राजस्थानी को प्राथमिकता दी जाए।
- किसी भी दूसरी भाषा को थोपने के बजाय अपनी मातृभाषा को शैक्षणिक संस्थानों में उचित स्थान मिले।
शिक्षा नीति और राजस्थानी भाषा
विश्वविद्यालयों में मराठी भाषा को पढ़ाने के हालिया निर्णय पर असंतोष व्यक्त करते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि भाषा का निर्णय सरकार की वर्तमान शिक्षा नीति के अनुरूप होना चाहिए। कुम्पावत ने स्पष्ट किया कि मराठी भाषा का सम्मान सर्वोपरि है, लेकिन राजस्थान की धरती पर राजस्थानी भाषा की उपेक्षा करके किसी अन्य भाषा को वरीयता देना उचित नहीं है।
शिक्षा विभाग और छात्रों पर प्रभाव
यदि राज्य सरकार इस मांग पर गंभीरता से विचार करती है, तो आगामी सत्रों में राजस्थान के विश्वविद्यालयों और माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के पाठ्यक्रमों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इसके लिए जयपुर सचिवालय और उच्च शिक्षा विभाग के स्तर पर नीतिगत निर्णय की आवश्यकता होगी। यदि ऐसा होता है, तो छात्रों को अपनी मातृभाषा में शोध करने और इसे उच्च शिक्षा का माध्यम बनाने के व्यापक अवसर प्राप्त होंगे।
हमारी टीम इस मामले पर निरंतर नजर बनाए हुए है। किसी भी आधिकारिक आदेश या शिक्षा नीति में होने वाले बदलाव की जानकारी सबसे पहले आप तक पहुंचाई जाएगी।
📲 खबर पसंद आई?
अपने दोस्तों के साथ शेयर करें!

Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।