
नागौर में जर्जर स्कूलों पर कलेक्टर सख्त: दो शिक्षा अधिकारियों को नोटिस!
Posted on 4 अगस्त 2026
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हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, जिले में जर्जर और असुरक्षित स्कूल भवनों को लेकर जिला कलेक्टर अक्षय गोदारा ने अत्यंत कड़ा रुख अपनाया है। मानसून के सक्रिय होने के बावजूद जर्जर घोषित किए गए स्कूल भवनों और कमरों को ध्वस्त करने की कार्रवाई में घोर लापरवाही बरतने पर मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी (सीडीईओ) सर्वेश और अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक (एडीपीसी) को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। यह कार्रवाई बच्चों की सुरक्षा के प्रति प्रशासन की गंभीरता को दर्शाता है, जिसे हमारी टीम DailyDhandora ने प्रमुखता से उठाया है।
लापरवाही का गंभीर मामला
हाल ही में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में आयोजित साप्ताहिक समीक्षा बैठक में यह गंभीर तथ्य सामने आया। इस बैठक में मानसून सत्र की तैयारियों, पेयजल आपूर्ति, बिजली व्यवस्था, मौसमी बीमारियों की रोकथाम और विभिन्न फ्लैगशिप योजनाओं की गहन समीक्षा की जा रही थी। इसी दौरान, जब शिक्षा विभाग से जुड़े बिंदुओं पर चर्चा हुई, तो यह बात स्पष्ट हुई कि सर्वे रिपोर्ट में जर्जर घोषित किए जा चुके कई स्कूल भवनों और कक्षों को ध्वस्त करने के आदेश अभी तक जारी नहीं किए गए हैं, और न ही इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाया गया है। यह स्थिति तब है जब हम मौजूदा मानसून सत्र के बीच में हैं, जहाँ ऐसी इमारतों से दुर्घटना का खतरा लगातार बना रहता है।
पलास्टर गिरने की घटना ने बढ़ाई चिंता
नोटिस में इस बात का भी विशेष उल्लेख किया गया है कि हाल ही में जिले के एक स्कूल में छत का प्लास्टर गिरने की घटना सामने आई थी। इस घटना ने जर्जर इमारतों से बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। हमारी टीम लगातार ऐसे मुद्दों पर अपनी नजर बनाए हुए है ताकि विद्यार्थियों को एक सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण मिल सके। मानसून सक्रिय होने के बावजूद, पूर्व में कई बार निर्देश दिए जाने के बाद भी शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई, जिसे जिला कलेक्टर ने अत्यंत गंभीर लापरवाही माना है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। यह 'बीकानेर निदेशालय' और 'जयपुर सचिवालय' से जारी होने वाले सुरक्षा निर्देशों की अवहेलना भी मानी जा रही है।
तीन दिन में मांगा स्पष्टीकरण
- दोनों अधिकारियों को तीन दिन के भीतर अपना लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
- स्पष्टीकरण के साथ-साथ उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर भी जवाब देना होगा।
- नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है या निर्धारित समय पर जवाब प्रस्तुत नहीं किया जाता है, तो नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
- यह कार्रवाई शिक्षा विभाग में जवाबदेही तय करने और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
हमारी टीम DailyDhandora का मानना है कि इस तरह की प्रशासनिक सख्ती से शिक्षा विभाग में लंबे समय से लंबित पड़े मुद्दों पर तेजी से काम होगा। जिला प्रशासन का यह निर्णय विद्यार्थियों की सुरक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है और हमें उम्मीद है कि जल्द ही सभी जर्जर भवनों को सुरक्षित या ध्वस्त कर दिया जाएगा, ताकि हमारे बच्चों को भयमुक्त वातावरण में शिक्षा मिल सके।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।