
राजस्थान में फर्जी मेडिकल का बड़ा खुलासा: 7 महीने गायब रही पटवारी, अब डॉक्टरों पर गाज
Posted on 21 जुलाई 2026
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हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, राज्य में सरकारी सेवा में तैनात कर्मचारियों द्वारा मेडिकल प्रमाण पत्रों के दुरुपयोग का एक गंभीर मामला सामने आया है। शिक्षा और प्रशासनिक महकमे में अपनी ड्यूटी से लंबी अवधि तक नदारद रहने वाले कर्मचारियों के लिए यह एक बड़ी चेतावनी है। डीग जिले में पदस्थ एक पटवारी द्वारा एसओजी की कार्रवाई से बचने के लिए फर्जी मेडिकल दस्तावेजों का सहारा लेने का मामला अब तूल पकड़ चुका है।
क्या है पूरा मामला?
कुम्हेर में कार्यरत महिला पटवारी चुंकी बाई ने सितंबर 2024 से अप्रैल 2025 के बीच अपनी ड्यूटी से दूरी बना ली थी। जांच में सामने आया है कि इस दौरान वह किसी गंभीर बीमारी से नहीं, बल्कि एसओजी की जांच के डर से गायब थी। अपनी इस अनुपस्थिति को वैध ठहराने के लिए उन्होंने जालोर जिले के 7 डॉक्टरों की मदद से 10 फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाए। हैरानी की बात यह है कि इन प्रमाण पत्रों के आधार पर उन्हें बार-बार बीमार घोषित किया गया, जबकि अस्पताल के रिकॉर्ड में न तो ओपीडी पर्ची बनी और न ही लैब में कोई जांच हुई।
सरकारी कार्मिकों के लिए सख्त निर्देश
यह प्रकरण स्पष्ट करता है कि बीकानेर निदेशालय और जयपुर सचिवालय अब सरकारी कार्यों में अनियमितता बरतने वालों पर सख्त नजर रखे हुए हैं। चाहे शिक्षा विभाग हो या राजस्व विभाग, ड्यूटी से गायब रहने के लिए 'फर्जी मेडिकल' का सहारा लेने वाले कार्मिक अब रडार पर हैं।
इस खबर के मुख्य बिंदु:
- फर्जीवाड़ा: बिना ओपीडी पर्ची और बिना भर्ती हुए 7 महीनों का मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाया गया।
- जांच का दायरा: तत्कालीन पीएमओ और वर्तमान सीएमएचओ स्तर के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे हैं।
- सख्त कार्रवाई: जिला स्तरीय कमेटी का गठन कर मामले की गहन जांच की जा रही है।
- कार्मिकों के लिए सबक: भविष्य में मेडिकल लीव के लिए अब पोर्टल पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है, ताकि फर्जीवाड़े पर रोक लग सके।
हम सभी सरकारी कार्मिकों को सलाह देते हैं कि वे अपनी उपस्थिति और मेडिकल लीव के दस्तावेजों को नियमनुसार ही प्रस्तुत करें। शिक्षा विभाग और अन्य संबंधित विभागों में 'शाला दर्पण' और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से अब हर छुट्टी का ऑडिट किया जा रहा है। राजस्थान के सभी विभागों को हिदायत दी गई है कि मेडिकल बोर्ड की सिफारिशों के बिना कोई भी लंबी छुट्टी का लाभ न दिया जाए।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।