
मासिक जांच आदेश पर मचा बवाल: निजी स्कूल बंद पर संशय, अभिभावक परेशान
Posted on 19 जुलाई 2026
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प्रदेश में शिक्षा विभाग द्वारा निजी स्कूलों की अनिवार्य मासिक जांच के आदेश ने शिक्षा जगत में हलचल मचा दी है। इस आदेश के विरोध में निजी स्कूल संचालकों के बीच आंदोलन की सुगबुगाहट तेज हो गई है, वहीं सोमवार, 20 जुलाई को स्कूलों को बंद रखने को लेकर गहरा असमंजस बना हुआ है। हमारी टीम इस पूरी स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है, क्योंकि इसका सीधा असर हजारों छात्रों और उनके अभिभावकों पर पड़ रहा है।
शिक्षा संबल योजना के तहत मासिक निरीक्षण अनिवार्य
माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर की ओर से निदेशक सीताराम जाट ने 'शिक्षा संबल योजना' के तहत एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। इस आदेश के अनुसार, शिक्षा अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों के सभी निजी स्कूलों का हर महीने अनिवार्य रूप से निरीक्षण करना होगा। इस मासिक जांच का मुख्य उद्देश्य स्कूलों की मान्यता से लेकर अन्य विभिन्न बिंदुओं की पड़ताल करना है, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता और नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। विभाग ने इस प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए एक विशेष ऐप भी विकसित किया है, जिसके माध्यम से निरीक्षण रिपोर्ट को ऑनलाइन अपलोड करना अनिवार्य होगा। यह कदम निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने और शिक्षा के स्तर को बनाए रखने की दिशा में उठाया गया है।
निजी स्कूल संगठनों में मतभेद: बंद को लेकर असमंजस गहराया
शिक्षा विभाग के इस मासिक जांच के आदेश को लेकर निजी स्कूल संचालक दो प्रमुख धड़ों में बंट गए हैं। यह मतभेद सोमवार, 20 जुलाई को प्रस्तावित स्कूल बंद को लेकर और भी गहरा गया है:
- पैपा (PEPA) संगठन का रुख: निजी स्कूल संगठन पैपा ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने इस मुद्दे पर निदेशक और अतिरिक्त शिक्षा सचिव के साथ वार्ता की है। संगठन के प्रदेश पदाधिकारी गिरिराज खैरीवाल के अनुसार, सरकार ने 24 जुलाई तक इस मामले पर कोई अंतिम निर्णय लेने का आश्वासन दिया है। इसी आश्वासन के चलते पैपा ने 20 जुलाई के बंद का समर्थन नहीं करने का फैसला किया है। संगठन का मानना है कि सरकारी निर्णय का इंतजार करना उचित होगा।
- सेवा संगठन का आह्वान: इसके विपरीत, सेवा संगठन ने सरकार के इस आदेश का पुरजोर विरोध करने का निर्णय लिया है। संगठन के कोडाराम भादू ने 20 जुलाई को प्रदेश भर के निजी स्कूलों को बंद रखने और शिक्षा निदेशालय पर एक बड़े प्रदर्शन का आह्वान किया है। संगठन का कहना है कि वे इस आदेश के खिलाफ आंदोलन के लिए पूरी तरह तैयार हैं और निजी स्कूलों के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष करेंगे।
नागौर सहित प्रदेश भर में अभिभावकों की चिंता
दोनों संगठनों के इस अलग-अलग रुख के चलते नागौर जिले सहित पूरे प्रदेश के निजी स्कूल संचालक और अभिभावक असमंजस में हैं। देर शाम तक भी कई स्कूलों को यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि उन्हें सोमवार को स्कूल खोलना है या बंद रखना है। हालांकि, कुछ निजी स्कूलों ने एहतियात के तौर पर सोमवार की छुट्टी की घोषणा कर दी और अभिभावकों को इसकी सूचना भी भेज दी है। लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे स्कूल हैं जो अंतिम समय तक स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं। इस अनिश्चितता ने अभिभावकों को गहरी चिंता में डाल दिया है कि सोमवार को उनके बच्चों को स्कूल भेजना है या नहीं। हमारी टीम लगातार इस स्थिति पर नजर रखे हुए है और जैसे ही कोई स्पष्ट जानकारी मिलेगी, हम तत्काल अपने पाठकों तक पहुंचाएंगे।
शिक्षा विभाग के इस नए आदेश और निजी स्कूलों के विरोध के बीच, यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार 24 जुलाई तक क्या निर्णय लेती है और शिक्षा व्यवस्था पर इसका क्या दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है। हमारी टीम सभी हितधारकों के लिए सटीक और विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।