
शिक्षा मंत्री का इस्तीफा क्यों नहीं? पायलट ने उठाया सवाल, विद्यार्थियों को मिलेगी राहत?
Posted on 18 जुलाई 2026
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जयपुर के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में एनएसयूआई द्वारा आयोजित 'छात्र संविधान संवाद' कार्यक्रम में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट ने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर तीखा प्रहार किया। विशेष रूप से, उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग और देशभर में हो रही भर्ती परीक्षाओं में धांधली के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। पायलट ने केंद्र सरकार द्वारा शिक्षाविद् सोनम वांगचुक को अनशन स्थल से हटाकर अस्पताल में भर्ती कराने की कार्रवाई को 'लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन' करार दिया।
शिक्षा व्यवस्था पर सरकार की नीतियां सवालों के घेरे में
सचिन पायलट ने कहा कि पूरे देश में भर्ती परीक्षाओं और शिक्षा व्यवस्था को लेकर शिक्षकों, छात्रों और अभिभावकों में भारी आक्रोश है। छात्र जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं और इसी क्रम में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग लगातार उठाई जा रही है। पायलट ने आरोप लगाया कि सरकार इस मांग को अनसुना कर रही है और विरोध की आवाज़ों को दबाने के लिए 'दमन का रास्ता' अपना रही है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार का कोई प्रतिनिधि सोनम वांगचुक से मिलकर उनकी मांगों पर चर्चा करता, तो शायद समाधान निकल आता। इसके बजाय, उन्हें जबरन उठाकर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जो कि संवाद की बजाय शक्ति प्रदर्शन है।
UPSC की तर्ज पर भर्ती परीक्षाओं में सुधार की मांग
कार्यक्रम के दौरान, विद्यार्थियों ने बार-बार होने वाली पेपर लीक की घटनाओं पर चिंता जताई। इस पर सचिन पायलट ने कहा कि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षाएं देश की सबसे पारदर्शी परीक्षाओं में से एक हैं और आज तक उनके पेपर लीक होने की कोई खबर सामने नहीं आई है। उन्होंने सुझाव दिया कि जिस तरह UPSC की कार्यप्रणाली और स्वायत्त व्यवस्था है, उसी तर्ज पर राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) अजमेर और अन्य भर्ती एजेंसियों के लिए भी एक स्वतंत्र और मजबूत व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। इससे भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता आएगी और विद्यार्थियों का विश्वास बहाल होगा।
पंचायत-निकाय चुनाव टालने पर भी घेरा
पायलट ने राजस्थान में पंचायत और नगर निकाय चुनावों को लेकर भी राज्य सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार जनादेश अपने खिलाफ जाता देख चुनाव टाल रही है। उन्होंने चिंता जताई कि जब तक प्रदेश में एक मजबूत और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया स्थापित नहीं हो जाती, तब तक विद्यार्थियों का शिक्षा व्यवस्था पर भरोसा कमजोर बना रहेगा।
मुख्य बिंदु:
- शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर सरकार पर दबाव।
- भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता के लिए UPSC जैसा मॉडल अपनाने का सुझाव।
- सोनम वांगचुक को जबरन हटाने की कार्रवाई की निंदा।
- विद्यार्थियों और शिक्षकों के बीच शिक्षा व्यवस्था को लेकर व्याप्त आक्रोश पर चिंता।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।