
शिक्षकों की भारी कमी: स्कूलों में ताले, पढ़ाई ठप
Posted on 19 जुलाई 2026
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बालोतरा जिले के सरकारी स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र के करीब दो माह बीत जाने के बावजूद शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों के सैकड़ों पद रिक्त पड़े हैं। प्राथमिक शिक्षक से लेकर व्याख्याता, प्रधानाचार्य और नॉन-टीचिंग स्टाफ तक की कमी विद्यार्थियों की शिक्षा पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डाल रही है।
व्यवस्थाएं चरमरा गईं
हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, कई स्कूलों में एक ही शिक्षक को विभिन्न कक्षाओं का जिम्मा संभालना पड़ रहा है। विषय विशेषज्ञों की अनुपलब्धता के कारण नियमित अध्ययन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। हाल ही में हुए तबादलों में, जिले से 175 शिक्षक चले गए, जबकि केवल 57 ही अन्य जिलों से यहां आए हैं। कुछ तबादले जिले के भीतर ही हुए हैं, जिससे समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।
आंदोलन का रास्ता अपनाने लगे ग्रामीण
शिक्षकों की इस गंभीर कमी से नाराज ग्रामीण अब आंदोलन का रुख अपना रहे हैं। कई गांवों में लोगों ने स्कूलों पर ताले जड़ दिए हैं और उग्र प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांग है कि शिक्षा विभाग तत्काल स्थाई शिक्षकों की नियुक्ति करे ताकि विद्यार्थियों का भविष्य सुरक्षित हो सके। शिक्षकों की कमी का सीधा असर परीक्षा परिणामों और विद्यार्थियों के समग्र विकास पर पड़ रहा है, जो चिंता का विषय है।
आगे क्या?
- शिक्षकों की मांग: स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों द्वारा स्थाई शिक्षकों की तत्काल नियुक्ति की मांग।
- अध्ययन पर प्रभाव: एक शिक्षक पर कई कक्षाओं का भार, विषय विशेषज्ञता का अभाव।
- तबादलों का असंतुलन: जिले से जाने वाले शिक्षकों की संख्या आने वाले शिक्षकों से कहीं अधिक।
- आंदोलनात्मक कार्रवाई: स्कूलों पर ताले जड़कर विरोध प्रदर्शन, सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास।
यह स्थिति शिक्षा विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रही है, जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि प्रदेश भर के सरकारी स्कूलों में पठन-पाठन सुचारू रूप से चल सके।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।