
नागौर स्कूलों में 'ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे' अभियान: विद्यार्थियों को 'कोर्ट वाली दीदी' व नशा मुक्ति की अहम जानकारी
Posted on 21 जुलाई 2026
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हमारे **नागौर** संवाददाता के अनुसार, शिक्षा विभाग के साथ मिलकर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) ने इस सप्ताह 'ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे' अभियान के तहत जिले के विभिन्न विद्यालयों में व्यापक विधिक जागरूकता शिविरों का आयोजन किया। इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को उनके कानूनी अधिकारों और कर्तव्यों से परिचित कराना, उन्हें सामाजिक बुराइयों के प्रति जागरूक करना और एक जिम्मेदार नागरिक बनाने के लिए प्रेरित करना था।
विधिक जागरूकता शिविरों का आयोजन
हमारी टीम ने पाया कि इन शिविरों में छात्रों को विभिन्न महत्वपूर्ण कानूनों और सामाजिक मुद्दों पर गहन जानकारी प्रदान की गई। इसमें नशा मुक्ति, साइबर अपराधों से बचाव, बाल विवाह निषेध जैसे विषयों को प्रमुखता से शामिल किया गया। इन आयोजनों ने विद्यार्थियों को कानूनी प्रक्रिया की सामान्य समझ देने के साथ-साथ उन्हें स्वयं और अपने समाज के प्रति सजग रहने का संदेश दिया।
नशा मुक्ति पर विशेष जोर
शिविरों में नालसा की 'डॉन-ड्रग जागरूकता एवं कल्याण, मार्गदर्शन-ड्रग मुक्त भारत' योजना 2025 पर विशेष बल दिया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस महत्वाकांक्षी योजना का लक्ष्य युवाओं और विद्यार्थियों को नशे के गंभीर दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करना है। इसके साथ ही, नशा प्रभावित व्यक्तियों को कानूनी सहायता, परामर्श और उनके पुनर्वास के लिए प्रेरित करने का कार्य भी इस योजना के तहत किया जाएगा। हमारी टीम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि इस महत्वपूर्ण संदेश को हर छात्र तक पहुंचाया जाए, ताकि वे नशे से दूर रहें और अपने आसपास के लोगों को भी इस बुराई के प्रति जागरूक करें।
'कोर्ट वाली दीदी' पहल का महत्व
इन जागरूकता कार्यक्रमों का एक महत्वपूर्ण पहलू 'कोर्ट वाली दीदी' पहल का विस्तृत परिचय था। विद्यार्थियों को बताया गया कि विद्यालयों में लगाई गई शिकायत पेटिकाओं में वे अपने साथ होने वाले किसी भी गलत व्यवहार या अन्य समस्याओं की गोपनीय लिखित शिकायत दर्ज करा सकते हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण इन शिकायतों का समयबद्ध और उचित निस्तारण सुनिश्चित करेगा, जिससे बच्चों को एक सुरक्षित और सहायक वातावरण मिल सके। यह पहल छात्रों को अपनी बात रखने और न्याय पाने का एक सीधा व गोपनीय माध्यम प्रदान करती है।
पर्यावरण संरक्षण और जन उपयोगी सेवाएँ
इन शिविरों में विधिक जागरूकता के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के संदेश को भी प्रमुखता दी गई। विद्यार्थियों को वृक्षारोपण के महत्व, पर्यावरण संतुलन बनाए रखने, वायु प्रदूषण कम करने, जल संरक्षण और भूजल स्तर बढ़ाने के उपायों के बारे में बताया गया। उन्हें अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का आह्वान किया गया। इसके अतिरिक्त, अधिकारियों ने सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं और स्थायी लोक अदालत की कार्यप्रणाली को भी समझाया। बिजली, पानी, परिवहन, डाक, टेलीफोन, अस्पताल और बीमा जैसी आवश्यक सेवाओं से जुड़े विवादों को बिना किसी कोर्ट फीस के सरल, सस्ता और त्वरित तरीके से निपटाने के लाभों पर प्रकाश डाला गया, जिससे आमजन को न्याय आसानी से मिल सके।
अन्य महत्वपूर्ण कानूनी जानकारियाँ
- अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण कानून: छात्रों को इस कानून के तहत मिलने वाले अधिकारों और सुरक्षा उपायों के बारे में बताया गया।
- अस्पृश्यता उन्मूलन: समाज से भेदभाव को समाप्त करने और समानता के महत्व पर जोर दिया गया।
- बाल विवाह निषेध: बाल विवाह के दुष्परिणामों और इसके खिलाफ कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई।
- 'मीडियेशन फॉर द नेशन' अभियान: विवादों को मध्यस्थता के माध्यम से सुलझाने के लाभ बताए गए।
- राष्ट्रीय लोक अदालत: लोक अदालतों के माध्यम से त्वरित न्याय पाने के तरीकों पर चर्चा की गई।
- नालसा हेल्पलाइन 1500: कानूनी सहायता के लिए उपलब्ध इस हेल्पलाइन के बारे में जानकारी दी गई।
- चाइल्ड हेल्पलाइन: बच्चों से संबंधित किसी भी आपात स्थिति या समस्या के लिए इस हेल्पलाइन के उपयोग के बारे में बताया गया।
हमारी टीम मानती है कि इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम हमारे विद्यार्थियों को न केवल उनके कानूनी अधिकारों के प्रति सशक्त करते हैं, बल्कि उन्हें एक जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह पहल शिक्षा के दायरे को विस्तृत कर छात्रों को समग्र विकास की ओर ले जाने का प्रयास है।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।