
जायल: राजकीय विद्यालयों में 'कृष्ण भोग' योजना से संस्कार और सद्भावना का संचार
Posted on 29 जुलाई 2026
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हमारे **जायल** संवाददाता के अनुसार, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, बड़ी खाटू में हाल ही में गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर एक विशेष 'गुरु सम्मान समारोह' का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राज्य सरकार की प्रतिष्ठित 'कृष्ण भोग' योजना के तहत संपन्न हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में सामाजिक समरसता, नैतिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण की भावना को जागृत करना है।
गुरुजनों का सम्मान और अभिनंदन
इस गरिमामयी समारोह में विद्यालय परिवार के समस्त गुरुजनों का आश्रम की ओर से सम्मान और अभिनंदन किया गया। यह परंपरा भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य संबंधों की अटूट डोर को मजबूत करती है, जहाँ गुरु को ज्ञान का प्रदाता और मार्गदर्शक माना जाता है। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने भी पत्र वाचन और प्रेरणादायक प्रस्तुतियाँ देकर अपनी श्रद्धा और सम्मान व्यक्त किया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया, जिससे उनमें आत्मविश्वास और उत्कृष्टता के प्रति लगन पैदा हो सके। कार्यक्रम के अंत में सभी छात्रों को मिठाई वितरित कर पर्व की खुशी साझा की गई।
'कृष्ण भोग' योजना: समग्र शिक्षा की नई दिशा
शिक्षा विभाग द्वारा संचालित 'कृष्ण भोग' योजना केवल भोजन या मिष्ठान वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों को जीवन के महत्वपूर्ण आयामों से जोड़ने का एक व्यापक प्रयास है। इस योजना के माध्यम से विद्यार्थियों को सामाजिक समरसता, सद्भावना, नशामुक्त जीवन, पर्यावरण संरक्षण और नैतिक शिक्षा का महत्व समझाया गया। शिक्षा निदेशालय, बीकानेर, की यह पहल विद्यार्थियों को केवल अकादमिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा भी देती है। हमारी टीम मानती है कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों के सर्वांगीण विकास में मील का पत्थर साबित होते हैं।
उच्च लक्ष्यों की ओर उन्मुख युवा
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को जीवन में उच्च लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करने का संकल्प भी दिलाया गया। उन्हें आईएएस, आईपीएस, इंजीनियर, डॉक्टर और पायलट जैसे प्रतिष्ठित पदों तक पहुँचने के लिए प्रेरित किया गया। इस प्रकार की प्रेरणा से युवाओं में आत्म-प्रेरणा जागृत होती है और वे अपने भविष्य के प्रति अधिक गंभीर और केंद्रित होते हैं। यह विद्यालयों की जिम्मेदारी है कि वे छात्रों को केवल पाठ्यक्रम पढ़ाएँ नहीं, बल्कि उनके सपनों को भी उड़ान दें।
शिक्षा विभाग का दूरदर्शी कदम
यह कार्यक्रम छात्रों में गुरुजनों के प्रति सम्मान, अनुशासन और उज्ज्वल भविष्य के प्रति प्रेरणा जागृत करने के मुख्य उद्देश्य को पूर्ण करता है। जयपुर सचिवालय में बैठे शिक्षा नीति निर्माताओं ने ऐसी योजनाओं के माध्यम से राजस्थान के ग्रामीण अंचलों में भी गुणवत्तापूर्ण और संस्कारयुक्त शिक्षा को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा है। हमारी टीम का मानना है कि ऐसे आयोजन न केवल शैक्षिक वातावरण को समृद्ध करते हैं, बल्कि समुदाय में भी सकारात्मक संदेश का संचार करते हैं। यह सुनिश्चित करता है कि हमारी नई पीढ़ी मजबूत नैतिक आधार पर खड़ी हो, जो एक सशक्त और जागरूक समाज के निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक है।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।