
राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल में नया विवाद: सचिव पद को लेकर संयुक्त निदेशक और प्रिंसिपल आमने-सामने
Posted on 24 जुलाई 2026
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राजस्थान के शिक्षा विभाग से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है, जिसने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। राज्य ओपन स्कूल (Rajasthan State Open School) में फर्जी अंकतालिकाओं के मामले की आग अभी पूरी तरह ठंडी भी नहीं हुई थी कि अब सचिव पद को लेकर एक नया और बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यह मामला संयुक्त निदेशक स्तर के अधिकारी और एक प्रिंसिपल के बीच पद के अधिकार को लेकर है, जिसका सीधा असर संस्थान के प्रशासनिक कामकाज पर पड़ सकता है।
हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, इस विवाद की जड़ में संयुक्त निदेशक सरिता सेहरा और वर्तमान सचिव अरुणा शर्मा हैं। सरिता सेहरा ने हाल ही में न्यायालय के आदेश पर संयुक्त निदेशक के पद पर कार्यभार ग्रहण किया है और अब वे स्टेट ओपन स्कूल के सचिव पद पर अपना दावा ठोक रही हैं। उनका तर्क है कि नियमानुसार, सचिव का पद संयुक्त निदेशक स्तर के अधिकारी के लिए ही आरक्षित होता है, न कि प्रिंसिपल कैडर के अधिकारी के लिए।
संयुक्त निदेशक का पक्ष: पद का अधिकार और अनदेखी का आरोप
- सरिता सेहरा, जो अब संयुक्त निदेशक के पद पर कार्यरत हैं, का कहना है कि स्टेट ओपन स्कूल में सचिव का पद संयुक्त निदेशक स्तर का ही होना चाहिए।
- उन्होंने 5 फरवरी, 2024 को उपनिदेशक के रूप में कार्यभार संभाला था और इसी वर्ष जनवरी में उन्हें संयुक्त निदेशक के पद पर पदोन्नत किया गया।
- बीकानेर में दी गई पोस्टिंग पर स्टे लेने के बाद, न्यायालय के आदेश से उन्हें इस माह संयुक्त निदेशक के रूप में यहां पदस्थापित किया गया।
- सेहरा ने इस बात पर जोर दिया है कि वह एक दिव्यांग महिला हैं और इसके बावजूद उन्हें उनके कैडर के अनुसार पद की जिम्मेदारी नहीं दी जा रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) और स्टेट ओपन के निदेशक तक अपनी शिकायत पहुंचाई है, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।
- उनका स्पष्ट कहना है कि वह प्रिंसिपल स्तर के अधिकारी के अधीन काम नहीं कर सकतीं और उन्हें उनके कैडर के हिसाब से ही पद दिया जाना चाहिए।
वर्तमान सचिव का पक्ष: सरकार के आदेश का पालन
- दूसरी ओर, वर्तमान सचिव अरुणा शर्मा, जो मूल रूप से प्रिंसिपल पद पर हैं और उन्हें सरकार ने स्टेट ओपन स्कूल में सचिव के पद पर लगाया है, ने सरिता सेहरा के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है।
- अरुणा शर्मा का कहना है कि उन्हें राज्य सरकार द्वारा इस पद पर नियुक्त किया गया है और उनके पास सचिव के पद पर काम करने का विधिवत आदेश है।
- उनका तर्क है कि सरिता सेहरा के पास सचिव पद पर नियुक्ति का कोई आदेश नहीं है और वह केवल कार्यभार ग्रहण करने के आदेश के साथ यहां आई हैं।
- शर्मा ने कहा कि वह राज्य सरकार के आदेशों का पालन कर रही हैं और सरकार उन्हें जहां भी नियुक्त करेगी, वे वहां काम करने को तैयार हैं। उन्होंने सरिता सेहरा पर 'बिना वजह मामले को तूल देने' का आरोप लगाया है।
यह विवाद राज्य ओपन स्कूल के प्रशासनिक ढांचे में एक बड़ी चुनौती बन गया है। जहां एक ओर संयुक्त निदेशक अपने कैडर के अनुसार पद पर अधिकार जता रही हैं, वहीं दूसरी ओर वर्तमान सचिव सरकार के आदेशों का हवाला दे रही हैं। इस स्थिति से संस्थान के महत्वपूर्ण निर्णय और कामकाज प्रभावित हो सकते हैं, जिससे हजारों छात्रों और शिक्षा से जुड़े हितधारकों पर अप्रत्यक्ष रूप से असर पड़ सकता है। इस मामले में जयपुर सचिवालय और बीकानेर निदेशालय के वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी, ताकि इस गतिरोध को जल्द से जल्द सुलझाया जा सके और स्टेट ओपन स्कूल का कामकाज सुचारू रूप से चलता रहे। हमारी टीम इस पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर बनाए हुए है और पल-पल की जानकारी आप तक पहुंचाती रहेगी।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।