
राजस्थान के स्कूलों में 'नशा मुक्ति' और 'कोर्ट वाली दीदी' अभियान की गूंज: 850 से अधिक छात्रों ने लिया संकल्प
Posted on 22 जुलाई 2026
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हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, राजस्थान के युवा पीढ़ी को नशे की गिरफ्त से बचाने और उन्हें एक उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर करने के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा 'ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूसडे' के तहत 'से नो टू ड्रग्स, से यस टू योर ड्रीम्स' विषय पर केंद्रित इस पहल से विद्यालयों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ है। यह अभियान न केवल छात्रों को नशे के दुष्परिणामों से अवगत करा रहा है, बल्कि उन्हें कानूनी सहायता और शिकायत निवारण के लिए एक सुलभ मंच भी प्रदान कर रहा है।
युवाओं को नशे से बचाने की पहल
नशे की बढ़ती प्रवृत्ति चिंता का विषय है, खासकर युवा वर्ग में इसका प्रसार भयावह परिणाम दे रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने स्कूलों में विशेष विधिक जागरूकता शिविरों का आयोजन किया। इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य छात्रों को नशे के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से बताना है। हम मानते हैं कि यदि युवावस्था में ही छात्रों को सही मार्गदर्शन मिल जाए, तो वे न केवल अपने जीवन को संवार सकते हैं बल्कि समाज में भी सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
852 छात्रों को दी गई विस्तृत जानकारी
आयोजित शिविरों में स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय और विभिन्न निजी विद्यालयों सहित कुल 852 छात्र-छात्राओं को नशे के बुरे प्रभावों, इससे होने वाले मानसिक एवं शारीरिक नुकसानों तथा सामाजिक दुष्परिणामों के बारे में गहनता से जानकारी प्रदान की गई। हमारी टीम का मानना है कि ऐसे जागरूकता कार्यक्रम छात्रों को सही और गलत के बीच अंतर समझने में मदद करते हैं, जिससे वे भविष्य में सही निर्णय ले सकें।
न्यायिक अधिकारियों ने किया सीधा संवाद
इन महत्वपूर्ण सत्रों के दौरान, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और न्यायिक मजिस्ट्रेट जैसे वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों ने सीधे छात्रों से संवाद किया। उन्होंने छात्रों को सकारात्मक जीवनशैली अपनाने, अपने लक्ष्य निर्धारित करने और नशे जैसी बुराइयों से हर हाल में दूर रहने का महत्वपूर्ण संदेश दिया। न्यायिक अधिकारियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भी गंभीर और प्रभावी बना दिया, जिससे छात्रों पर गहरा प्रभाव पड़ा।
'कोर्ट वाली दीदी' पहल से छात्रों को मिली सुरक्षा
राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (रालसा) की अभिनव पहल 'कोर्ट वाली दीदी' के तहत सभी विद्यालयों में शिकायत एवं सुझाव पेटियां स्थापित की गई हैं। इन पेटियों के माध्यम से विद्यार्थी अपनी किसी भी समस्या या शिकायत को पूरी गोपनीयता के साथ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण तक पहुंचा सकेंगे। प्राधिकरण ने आश्वासन दिया है कि इन शिकायतों पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। यह पहल छात्रों को एक सुरक्षित मंच प्रदान करती है, जहां वे बिना किसी डर के अपनी समस्याएं साझा कर सकते हैं।
हेल्पलाइन नंबर और जागरूकता सामग्री का वितरण
इस अवसर पर, छात्रों को रालसा द्वारा प्रकाशित जागरूकता पुस्तिकाएं और पैम्फलेट भी वितरित किए गए। इन उपयोगी सामग्रियों को विद्यालयों के व्हाट्सएप समूहों में भी साझा किया गया, ताकि अधिक से अधिक छात्र-छात्राएं और उनके परिवार लाभान्वित हो सकें। इसके अतिरिक्त, विद्यार्थियों को नालसा टोल फ्री हेल्पलाइन 15100 और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की जानकारी भी दी गई, ताकि आवश्यकता पड़ने पर वे कानूनी एवं अन्य सहायता प्राप्त कर सकें। हमारी टीम का उद्देश्य है कि हर छात्र को यह पता हो कि मदद हमेशा उपलब्ध है।
नशामुक्त जीवन का संकल्प और उज्ज्वल भविष्य की ओर कदम
कार्यक्रम में चीफ एलएडीसी, असिस्टेंट एलएडीसी, कनिष्ठ सहायक, विद्यालयों के प्रधानाचार्य, शिक्षक और अन्य स्टाफ सदस्य मौजूद रहे। जिलेभर में आयोजित इन छह शिविरों से करीब 852 छात्र-छात्राएं लाभान्वित हुए, जिन्होंने नशामुक्त जीवन अपनाने का दृढ़ संकल्प लिया। हम मानते हैं कि यह पहल हमारे युवाओं को एक स्वस्थ, सुरक्षित और सफल भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाने के लिए प्रेरित करेगी। यह अभियान राजस्थान के हर कोने में युवाओं को सशक्त बनाने की हमारी प्रतिबद्धता का एक प्रमाण है।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।