
एम्स जोधपुर: रैगिंग की शिकायत पर फेल, स्वतंत्र परीक्षा में पास होने का मामला गरमाया
Posted on 24 जुलाई 2026
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नागौर: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), जोधपुर में एक गंभीर अकादमिक अन्याय का मामला सामने आया है। एम.सीएच. न्यूरोसर्जरी (बैच 2020-23) के छात्र डॉ. विक्रांत शर्मा ने संस्थान के कुछ वरिष्ठ चिकित्सकों पर रैगिंग की शिकायत के बाद उन्हें जानबूझकर अकादमिक रूप से नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया है कि जून 2023 में आयोजित अंतिम परीक्षा में उन्हें असफल घोषित कर दिया गया था, जबकि दिसंबर 2024 में एक स्वतंत्र परीक्षा में वे सफलतापूर्वक उत्तीर्ण हुए।
रैगिंग की शिकायत और उसके बाद का संघर्ष
हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, डॉ. विक्रांत शर्मा ने वर्ष 2021 में अपने एक वरिष्ठ छात्र द्वारा की गई रैगिंग की शिकायत संस्थान के अधिकारियों से की थी। उनका आरोप है कि इस शिकायत के बाद, विभाग के कुछ वरिष्ठ चिकित्सकों ने उनके प्रति द्वेषपूर्ण रवैया अपनाया और उनके शैक्षणिक मूल्यांकन को प्रभावित किया। उन्होंने अपने पत्र में इन चिकित्सकों पर निष्पक्ष मूल्यांकन न करने और जानबूझकर उनके करियर को नुकसान पहुंचाने का गंभीर आरोप लगाया है।
जानबूझकर फेल करने का आरोप और RTI से खुलासे
डॉ. शर्मा ने बताया कि जून 2023 में एम.सीएच. न्यूरोसर्जरी की अंतिम परीक्षा में उन्हें कथित तौर पर जानबूझकर असफल किया गया। सूचना के अधिकार (RTI) के माध्यम से दस्तावेज प्राप्त करने पर, उन्हें कई अनियमितताओं का पता चला। इनमें तीन साल के आंतरिक थ्योरी मूल्यांकन को गलत तरीके से प्रस्तुत करना, प्रैक्टिकल इंटरनल असेसमेंट का नियमानुसार आयोजन न करना, और उनकी थीसिस, शोध कार्य, प्रकाशनों व पुरस्कारों का मूल्यांकन न करना शामिल है।
स्वतंत्र परीक्षा में सफलता का दावा
डॉ. शर्मा ने आगे कहा कि दिसंबर 2024 में, सुरक्षा और वीडियोग्राफी की निगरानी में एक स्वतंत्र बाहरी परीक्षा आयोजित की गई, जिसमें वे सफल रहे और अंततः एम.सीएच. न्यूरोसर्जरी परीक्षा उत्तीर्ण की। उनका प्रश्न है कि यदि वे स्वतंत्र और निष्पक्ष परीक्षा में पास हो सकते थे, तो जून 2023 में उन्हें क्यों असफल घोषित किया गया?
मामला पहुंचा केंद्रीय मंत्री तक
यह मामला अब राज्यसभा सांसद राजेन्द्र गहलोत और सांसद हनुमान बेनीवाल के माध्यम से केंद्र सरकार तक पहुंच गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने 22 अप्रैल 2026 को सांसद राजेन्द्र गहलोत को लिखे पत्र में स्वीकार किया था कि उन्हें डॉ. विक्रांत शर्मा की ओर से रैगिंग संबंधी शिकायत मिली है और उन्होंने मामले को उचित कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग को भेज दिया है। डॉ. शर्मा का कहना है कि मंत्री स्तर पर पत्र जारी होने के बावजूद, अब तक कोई निष्पक्ष जांच नहीं हुई है और न ही उनकी शिकायतों का समाधान हुआ है।
'चौथे प्रयास की डिग्री नहीं, पहले प्रयास का न्याय चाहिए'
डॉ. शर्मा वर्तमान में चौथे प्रयास में उत्तीर्ण होने की डिग्री प्राप्त कर रहे हैं। उनका तर्क है कि यदि मूल्यांकन निष्पक्ष होता, तो वे जून 2023 में ही पहले प्रयास में सफल हो जाते। उनका कहना है कि मेडिकल शिक्षा में 'प्रयासों' की संख्या का सीधा असर चिकित्सक के भविष्य और सरकारी नियुक्तियों पर पड़ता है, और वे पहले प्रयास में मिली असफलता का न्याय चाहते हैं, न कि चौथे प्रयास की डिग्री।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।