
जयपुर में ग्रैंड पेरेंट्स डे समारोह: बुजुर्गों का सम्मान और बच्चों के लिए निःशुल्क दंत चिकित्सा की पहल
Posted on 28 जुलाई 2026
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जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में हाल ही में आयोजित 'ग्रैंड पेरेंट्स डे' समारोह ने परिवार, संस्कृति और बुजुर्गों के सम्मान के महत्व को एक बार फिर रेखांकित किया है। साहस फाउंडेशन द्वारा सोफिया स्कूल के चर्च में आयोजित इस कार्यक्रम ने न केवल दादा-दादी और नाना-नानी को सम्मानित किया, बल्कि भावी पीढ़ी के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश भी दिया। हमारी टीम का मानना है कि ऐसे आयोजन सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करते हैं और विद्यालयों में नैतिक शिक्षा को बढ़ावा देते हैं, जो शिक्षा विभाग के व्यापक लक्ष्यों का हिस्सा है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, दूरदर्शन के पूर्व अधिकारी ओ. पी. राजपुरोहित ने अपने संबोधन में कहा कि दादा-दादी और नाना-नानी सिर्फ परिवार के वरिष्ठ सदस्य नहीं होते, बल्कि वे हमारी संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों के सशक्त आधार होते हैं। उनका असीम स्नेह, अनमोल त्याग और निस्वार्थ आशीर्वाद आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य धरोहर है। यह विचार हमें हमारे नागौर जिले सहित पूरे प्रदेश के विद्यालयों में बच्चों को अपने बड़ों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का पाठ पढ़ाने के लिए प्रेरित करता है।
बुजुर्गों के सम्मान पर विशेष बल
सिटी पैलेस ट्रस्ट की ट्रस्टी सुश्री रमा दत्त ने अपने प्रेरक उद्बोधन में परिवार के महत्व, संस्कारों की गरिमा और बुजुर्गों के सम्मान की आवश्यकता पर गहराई से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एक सभ्य समाज की पहचान उसके बुजुर्गों के प्रति आदर भाव से होती है। समारोह अध्यक्ष फादर एडवर्ड ओलिवेरा, पैरिश पादरी ने सभी नागरिकों से पुरजोर अपील की कि वे अपने परिवार के बुजुर्गों का सम्मान करें, उनके जीवन के अनुभवों से सीख लें और उनके आशीर्वाद को जीवन की सबसे बड़ी पूँजी मानें। यह अपील केवल एक समारोह तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा बननी चाहिए।
इस अवसर पर 70 दादा-दादी एवं नाना-नानी को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। उनके चेहरों पर झलकी प्रसन्नता, आत्मीयता और जीवन के अनुभवों की गरिमा ने पूरे वातावरण को भावविभोर कर दिया। ऐसे पल बच्चों के मन पर अमिट छाप छोड़ते हैं और उन्हें बड़ों की भूमिका और महत्व को समझने में मदद करते हैं। यह एक प्रकार से व्यावहारिक शिक्षा का उत्तम उदाहरण है।
निःशुल्क दंत चिकित्सा की सराहनीय पहल
कार्यक्रम में एक और महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली, जो सीधे तौर पर छात्र कल्याण से जुड़ी है। डॉ. नीरज, डॉ. मोनिका पचौरी, डॉ. प्रतिभा कामथ और सुश्री लिशा सहित दंत चिकित्सकों की एक पूरी टीम का भी सम्मान किया गया। सारस्वत अस्पताल ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी दादा-दादी के लिए निःशुल्क दंत परीक्षण की घोषणा की। इसके साथ ही, सोफिया स्कूल के सभी बच्चों के लिए भी निःशुल्क दंत चिकित्सा शिविर लगाने की घोषणा की गई, जो निश्चित रूप से बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति एक जिम्मेदार कदम है।
यह पहल दर्शाती है कि विद्यालय सिर्फ अकादमिक शिक्षा का केंद्र नहीं होते, बल्कि वे छात्रों के समग्र स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति भी संवेदनशील होते हैं। हमारी टीम का मानना है कि ऐसे स्वास्थ्य शिविर अन्य विद्यालयों द्वारा भी अपनाए जाने चाहिए, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच सीमित होती है। यह बच्चों की पढ़ाई में भी मदद करेगा, क्योंकि स्वस्थ बच्चे ही बेहतर ढंग से सीख पाते हैं।
इस सफल और अविस्मरणीय कार्यक्रम के लिए साहस फाउंडेशन, सहयोगी संगठनों, डेंज़िल नज़ारेथ एवं सुश्री सैजल डिडवानिया के समर्पण और उत्कृष्ट समन्वय की सराहना की गई। ऐसे आयोजन हमें सामाजिक एकजुटता और मानवीय मूल्यों को बनाए रखने के लिए प्रेरित करते हैं।
हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, यह समारोह पूरे राजस्थान के लिए एक प्रेरणा है कि कैसे हम अपनी जड़ों से जुड़े रहें और नई पीढ़ी को बेहतर भविष्य के लिए तैयार करें।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।